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    MP में चीते की मौत के मामले में एक्शन, छह वनकर्मियों पर गिरी गाज; दो आरोपी गिरफ्तार

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क में उन्नीस महीने के नर चीते (KNG22) की गोली मारकर की गई हत्या के मामले में वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने अपनी जांच और कार्रवाई की गति को बेहद तेज कर दिया है। वन्यजीव सुरक्षा में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों के चलते वन विभाग ने दो रेंजर्स, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षकों सहित कुल छह विभागीय कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मुरैना पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है और उनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिए गए हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि आखिर कड़े सुरक्षा घेरे वाले संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर हथियार लेकर प्रवेश करने वाले अपराधियों को रोकने में पार्क का सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से कैसे नाकाम साबित हुआ।

    घायल अवस्था में मिला था चीता और जबलपुर में हुआ इलाज

    इस पूरी दुखद घटना का खुलासा पच्चीस अक्टूबर को हुआ, जब श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के अंतर्गत आने वाले कंपार्टमेंट नंबर 748 में चीता शावक KNG22 अत्यधिक गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया था। प्रारंभिक स्तर पर की गई जांच और पशु चिकित्सकों द्वारा किए गए परीक्षण के उपरांत उसके शरीर के भीतर विदेशी वस्तुएं होने की पुष्टि हुई थी। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर और उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज शुरू किया गया।

    सर्जनों द्वारा निकाले गए छर्रे और वन्यजीव संघर्ष की सच्चाई

    जबलपुर के अस्पताल में जब चीते का सीटी स्कैन और एक्स-रे कराया गया, तब यह भयावह सच सामने आया कि उसके आंतरिक अंगों के साथ-साथ मांसपेशियों, हड्डियों और प्रमुख तंत्रिका तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। आपातकालीन शल्यक्रिया (सर्जरी) के दौरान डॉक्टरों ने उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे सफलतापूर्वक बाहर निकाले। हालांकि, चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद सत्ताइस अक्टूबर की तड़के उस दुर्लभ चीते ने दम तोड़ दिया और उसकी मौत हो गई। शुरुआती तौर पर इसे सामान्य वन्यजीव संघर्ष समझा जा रहा था, लेकिन पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह किसी वन्यजीव का आपसी संघर्ष नहीं बल्कि सुनियोजित ढंग से गोली मारकर किया गया जघन्य अपराध था।

    वन विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता और सीबीआई जांच की मांग

    छह लापरवाह वनकर्मियों के निलंबन के बाद अब विभाग के भीतर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह बिंदु बना हुआ है कि कूनो के इतने संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में अवांछित तत्वों की संदिग्ध आवाजाही पर समय रहते निगरानी क्यों नहीं रखी जा सकी। इस गंभीर मामले को लेकर वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं और जानकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके तहत वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से उच्चस्तरीय जांच कराने तथा कूनो के मौजूदा फील्ड डायरेक्टर और संबंधित डीएफओ को उनके पदों से तुरंत हटाए जाने की पुरजोर मांग की है।

    केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय टीम और प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा पर सवाल

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' के अंतर्गत लगभग उन्यासी वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात भारत की धरती पर हुई किसी चीते की गोली मारकर हत्या की इस पहली घटना को केंद्र सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र द्वारा एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल पहले ही भेजा जा चुका है, वहीं राज्य सरकार ने भी वन विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करते हुए एक विशेष संयुक्त जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस घटना ने देश में वन्यजीवों के संरक्षण, अभ्यारण्यों की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा उपायों के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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