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    Homeराज्यबिहार472 एकड़ जमीन पर प्रशासन ने लगाया ताला, सभी गतिविधियों पर रोक

    472 एकड़ जमीन पर प्रशासन ने लगाया ताला, सभी गतिविधियों पर रोक

    मुजफ्फरपुर में सैटेलाइट टाउनशिप का रास्ता साफ: जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक

    राज्य सरकार ने मुजफ्फरपुर में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई टाउनशिप बसाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, चिन्हित 'विशेष क्षेत्र' और 'कोर क्षेत्र' में अब जमीन की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
    डेडलाइन: मास्टर प्लान को अधिसूचित करने के लिए 30 जून 2027 तक की समय सीमा तय की गई है।
    प्रतिबंध: जब तक मास्टर प्लान आधिकारिक रूप से लागू नहीं हो जाता, तब तक इन क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण या किसी भी तरह का विकास कार्य गैर-कानूनी माना जाएगा।

    472 एकड़ में आकार लेगी 'ग्रीनफील्ड टाउनशिप'

    मुजफ्फरपुर के पानापुर हवेली क्षेत्र में लगभग 472 एकड़ भूमि पर इस आधुनिक टाउनशिप को बसाने की तैयारी है।

    • शामिल क्षेत्र: इसके दायरे में पानापुर हवेली के अलावा रामपुर शाह, श्यामपुर भोज, रायपुरा रायप और बंगड़ा जैसे कई राजस्व गांव शामिल किए गए हैं।
    • सर्वे: हाल ही में इन इलाकों का एरियल सर्वे (हवाई सर्वेक्षण) पूरा कर उसकी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है।

    कनेक्टिविटी और रणनीतिक लोकेशन

    इस नई टाउनशिप की सबसे बड़ी खूबी इसकी लोकेशन है:

    • एयरपोर्ट से नजदीकी: प्रस्तावित स्थल मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
    • फोरलेन कनेक्टिविटी: यह क्षेत्र तुर्की-मधौल-कांटी न्यू फोरलेन के अत्यंत निकट है, जिससे भविष्य में परिवहन और व्यापारिक गतिविधियां सुगम होंगी।

    मड़वन क्षेत्र में भी विस्तार की संभावना

    पानापुर हवेली के साथ-साथ विभाग अब मड़वन ब्लॉक पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। जानकारों का मानना है कि मड़वन क्षेत्र में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए यहाँ भी ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

    मास्टर प्लान 2041 का हिस्सा

    इस पूरी योजना को मुजफ्फरपुर मास्टर प्लान 2041 के तहत 'कोर क्षेत्र' के रूप में नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य शहरी विकास के लिए पहले से ही जमीन को सुरक्षित करना है, ताकि भविष्य में बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार करते समय किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या कानूनी बाधा का सामना न करना पड़े।

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