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    डॉक्टर के पास जाने से लगता है डर, कहीं आप Iatrophobia के शिकार तो नहीं?

    क्या अस्पताल का नाम सुनते ही आपके हाथ-पैरे ठंडे पड़ने लगते हैं या डॉक्टर के पास जाने की सोचकर दिल की धड़कन तेज हो जाती है? अगर ऐसा है, तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो मामूली बीमारी में भी अस्पताल जाने से कतराते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब डॉक्टर या मेडिकल जांच का डर इतना बढ़ जाए कि इंसान अपनी सेहत को नजरअंदाज करने लगे, तो इसे लैट्रोफोबिया (Iatrophobia) कहा जाता है। यह कोई मामूली हिचकिचाहट नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक डर या फोबिया है।

    लैट्रोफोबिया (Iatrophobia) क्या है?

    साइंसडायरेक्ट के अनुसार, लैट्रोफोबिया का मतलब डॉक्टरों, अस्पतालों या मेडिकल इलाज के प्रति अत्यधिक और अकारण डर से है। सामान्य मामलों में लोग सुई या किसी बड़े ऑपरेशन से थोड़ा डरते हैं, लेकिन इस फोबिया से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर के पास जाने के ख्याल मात्र से पसीना-पसीना होने लगता है। कई बार लोग इस डर की वजह से गंभीर बीमारियों की जांच भी नहीं कराते, जिससे उनकी सेहत और ज्यादा बिगड़ जाती है।

    लोगों को डॉक्टर से डर क्यों लगता है?

    • बचपन का बुरा अनुभव: बचपन में सुई लगवाते समय हुआ दर्द, कड़वी दवा या डॉक्टर की डांट का असर दिमाग में घर कर जाता है।

    • बुरी खबर सुनने का डर: कई लोगों को लगता है कि डॉक्टर के पास जाने पर कोई गंभीर बीमारी सामने आ जाएगी।

    • सफेद कोट का डर (White Coat Syndrome): कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर घर पर नॉर्मल रहता है, लेकिन डॉक्टर के सामने आते ही बढ़ जाता है।

    • दर्द या इंजेक्शन का डर: सुई, खून के टेस्ट या मेडिकल उपकरणों से लगने वाला शारीरिक दर्द भी इस डर की बड़ी वजह बनता है।

    • कंट्रोल खोने का अहसास: अस्पताल में जाने पर यह महसूस होना कि शरीर और फैसले पर उनका अपना कोई बस नहीं है, घबराहट पैदा करता है।

    लैट्रोफोबिया के लक्षण और बचाव के उपाय

    अस्पताल या डॉक्टर के नाम से अचानक तेज घबराहट, दिल की धड़कन का तेज होना, सांस फूलना, चक्कर आना या बीमारी होने के बावजूद डॉक्टर के पास जाने से बार-बार बचना इसके मुख्य लक्षण हैं। इस डर को कम करने के लिए डॉक्टर से खुलकर बात करें, किसी करीबी को साथ ले जाएं, सवालों की लिस्ट बनाकर जाएं, गहरी सांस लेने के अभ्यास (Breathing Exercises) करें और सीधे बड़े अस्पताल जाने के बजाय पहले किसी फैमिली डॉक्टर से मिलें।

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