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    केंद्र की हरी झंडी के बाद बरेली में हवाई सेवाओं का विस्तार, दो चरणों में बनेगी नई पट्टी

    उत्तर प्रदेश के बरेली के लिए बड़ी खुशखबरी है. लंबे समय से चल रहा बरेली एयरपोर्ट विस्तार का सपना अब साकार होने जा रहा है. एयरपोर्ट विस्तार को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है. अब सिविल एन्क्लेव का क्षेत्रफल करीब 30 हजार वर्गमीटर तक बढ़ाया जाएगा. यह विस्तार पूरा होने के बाद एयरपोर्ट से अधिक उड़ानें शुरू हो सकेंगी और बरेली का संपर्क देश के बड़े शहरों से और मजबूत होगा. फिलहाल बरेली से केवल मुंबई और बेंगलुरू के लिए हवाई सेवा उपलब्ध है, लेकिन विस्तार के बाद जयपुर और दिल्ली के लिए उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है.

    अभी बरेली एयरपोर्ट पर तीन एप्रन यानी विमानों को खड़ा करने की जगहें हैं. अब विस्तार के बाद 10 नए एप्रन बनाए जाएंगे, ताकि एक साथ अधिक विमान यहां पार्क किए जा सकें. साथ ही, दो चरणों में नई हवाई पट्टी भी बनाई जाएगी. पूरे प्रोजेक्ट पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

    एयरपोर्ट के निदेशक अवधेश अग्रवाल ने बताया कि विस्तार के बाद बरेली में बड़ी और आधुनिक उड़ानें संचालित करने की सुविधा मिल सकेगी. उन्होंने कहा कि इससे न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि बरेली के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी.

    सभी जमीन विवाद सुलझे
    इस एयरपोर्ट के विस्तार में सबसे बड़ी अड़चन जमीन विवाद की थी, जो अब पूरी तरह सुलझा ली गई है. मुड़िया अहमदनगर और चावड़ गांव में स्थित पांच निजी जमीनों का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है और उनकी रजिस्ट्री भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के नाम हो चुकी है. इसके अलावा, सरकारी जमीन को भी एएआई के पक्ष में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

    कुल मिलाकर एयरपोर्ट विस्तार के लिए 25.50 एकड़ जमीन की जरूरत है. इसमें से 5 एकड़ जमीन रक्षा संपदा विभाग की है, जबकि बाकी किसानों और राज्य सरकार की है. रक्षा विभाग की जमीन हस्तांतरित करने की औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं. राज्य सरकार की कुछ जमीनें, जैसे मयूरवन चेतना केंद्र और हाईवे किनारे स्थित भूमि, भी जल्द एएआई को सौंपी जानी हैं.

    दिल्ली और जयपुर उड़ानों पर नजर
    फिलहाल बरेली से दिल्ली और जयपुर के लिए उड़ानें शुरू करने की तैयारी चल रही है. पहले भी दिल्ली के लिए उड़ानें शुरू की गई थीं, लेकिन स्लॉट की कमी और तकनीकी कारणों से उन्हें बंद करना पड़ा था. जयपुर के लिए दो निजी विमानन कंपनियों से बातचीत जारी है.

    निदेशक अवधेश अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर स्लॉट न मिलने के कारण फिलहाल उड़ानें शुरू नहीं हो पा रही हैं. अब जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि वहां से बरेली को स्लॉट मिल सके और दिल्ली-बरेली उड़ानें दोबारा शुरू की जा सकें.

    विकास की नई उड़ान भरेगा बरेली
    एयरपोर्ट विस्तार से बरेली शहर को सीधा फायदा मिलेगा. नई उड़ानें शुरू होने से व्यापार, पर्यटन और निवेश के अवसर बढ़ेंगे. एयरपोर्ट का आधुनिक रूप शहर की पहचान को और मजबूत करेगा. अभी बरेली एयरपोर्ट का टर्मिनल छोटा है और स्लॉट सीमित हैं, जिसके कारण नई उड़ानें शुरू करने में दिक्कत आती है, लेकिन विस्तार के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी.

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