नई दिल्ली। भारत के विशाल विमानन बाजार और हवाई यात्रा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार लाने के लिए देश भर में एयरपोर्ट से जुड़े शुल्क और भारी-भरकम करों में कमी किए जाने की सख्त आवश्यकता है। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में भारत में हवाई अड्डों से जुड़े प्रभार और शुल्क काफी ऊंचे स्तर पर हैं, और यदि इन्हें तर्कसंगत बनाकर कम किया जाए, तो संपूर्ण एविएशन सेक्टर को तीव्र गति से आगे बढ़ने के प्रचुर अवसर प्राप्त होंगे।
लागत में कमी और एयरपोर्ट कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विली वॉल्श ने इस बात पर विशेष बल दिया कि देश के विमानन इकोसिस्टम से जुड़े प्रत्येक पक्ष को अपनी परिचालन लागत को न्यूनतम करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए। एयरलाइंस कंपनियां हमेशा से यह अपेक्षा रखती हैं कि उन्हें हवाई अड्डों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और इसके एवज में कम दरों पर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट संचालन करने वाली कंपनियों को शुल्कों के निर्धारण के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी रुख अपनाना होगा, क्योंकि देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर व्यावहारिक रूप से एकाधिकार जैसी स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते उनकी मूल्य निर्धारण नीतियों की समीक्षा करना अनिवार्य हो जाता है।
बाजार को मिलेगा प्रोत्साहन और इंडिगो की स्थिति
वॉल्श ने जोर देकर कहा कि यदि एयरपोर्ट शुल्क और टैक्स दरों में कटौती की जाती है, तो इससे भारतीय विमानन बाजार को जबरदस्त आर्थिक लाभ पहुंचेगा और हवाई यात्रा आम नागरिकों के लिए और अधिक सुलभ हो सकेगी। उन्होंने इस दौरान यह भी दोहराया कि एयरपोर्ट शुल्कों को लेकर उनका पूर्ववर्ती दृष्टिकोण आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। गौरतलब है कि इंडिगो वर्तमान में देश की सबसे बड़ी विमानन सेवा प्रदाता है, जिसकी घरेलू बाजार में हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से भी अधिक है। कंपनी अकेले दम पर देश भर में प्रतिदिन लगभग 2,200 उड़ानों का सफल संचालन करती है। वर्तमान में भारत के भीतर 160 से अधिक छोटे-बड़े हवाई अड्डे कार्यरत हैं, और वॉल्श के अनुसार सेक्टर के निरंतर विकास के लिए सभी संबंधित पक्षों को लागत नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना होगा।


