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    दीपेंद्र हुड्डा को हराने के बाद साजिश का आरोप, बृजभूषण सिंह के बयान पर महिला पहलवान की प्रतिक्रिया

    गोंडा| भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि कुश्ती संघ के चुनावों में दीपेंद्र हुड्डा को शिकस्त देने के कारण ही उनके खिलाफ गहरी साजिश रची गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार के दबाव और शह पर ही कुछ महिला पहलवानों को उनके खिलाफ आगे किया गया था।

    अपने विश्नोहरपुर स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि हरियाणा में वैसे तो अनगिनत कुश्ती अकादमियां हैं, लेकिन 'महादेव रेसलिंग एकेडमी' सीधे तौर पर एक खास परिवार से जुड़ी हुई है, जिसे स्थापित करने में भूपेंद्र हुड्डा की बहुत बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का 'एक परिवार, एक अखाड़ा' संबंधी निष्कर्ष उनके बयानों पर नहीं, बल्कि दो पीड़ित लड़कियों के बयानों पर आधारित है। उन्होंने संतोष जताया कि न्यायालय के इन फैसलों से आखिरकार उनकी बात सच साबित हुई है।

    'बिना स्वतंत्र पुष्टि के मुझे दुष्कर्म का आरोपी बताया गया'

    पूर्व सांसद ने पहलवानों के बयानों में भारी विरोधाभास होने का दावा करते हुए कहा कि निगरानी समिति, दिए गए शपथ पत्रों और अदालत के समक्ष दर्ज बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा कि हिसार और रोहतक के कुछ पहलवानों द्वारा बजरंग पूनिया का पता दिया गया था। बृजभूषण सिंह ने साफ किया कि जिन घटनाओं का उनके ऊपर आरोप लगाया गया, उस वक्त वह उन जगहों पर मौजूद ही नहीं थे। उनके मुताबिक, इस पूरे षड्यंत्र के पीछे कुल 42 लोग शामिल थे और इस साजिश को धार देने के लिए कुछ बड़े उद्योगपतियों द्वारा पैसा भी लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में बिना किसी स्वतंत्र पुष्टि के उन्हें सीधे तौर पर दुष्कर्म का आरोपी करार दे दिया गया।

    नियमों में बदलाव और राजनीति का अखाड़ा

    उन्होंने आगे बताया कि जूनियर पहलवानों के भविष्य और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तथा ट्रायल की चयन प्रक्रिया के नियमों में कुछ जरूरी बदलाव किए गए थे। लेकिन कुछ कथित नामी पहलवान बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया से गुजरे सीधे सीधे बड़े मुकाबलों में जगह पाना चाहते थे, जिसके चलते इन सुधारों का विरोध राजनीतिक रंग ले गया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि आगे चलकर यह पूरा आंदोलन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के हाथों की कठपुतली बन गया। इस सियासी ड्रामे के कारण भारतीय खेल व्यवस्था के साथ-साथ खुद महिला खिलाड़ियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अपनी कोई जमीनी ताकत नहीं बची है और वह केवल समाजवादी पार्टी के बैसाखियों के सहारे ही चुनाव लड़ने की स्थिति में है।

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