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    आरोपों के बीच किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा बयान, बोले- ऐसी कोई हथकड़ी बनी ही नहीं

    जयपुर। राजस्थान में मूंगफली के जब्त किए गए 15 करोड़ रुपये के नकली बीजों को गुपचुप तरीके से गुजरात भेजने और जांच रिपोर्ट को रफा-दफा करने के एवज में 2.45 करोड़ रुपये की घूसखोरी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की गिरफ्त में आए आरोपियों से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मामले के मुख्य साजिशकर्ता और बीज निगम के पूर्व निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई ने स्वीकार किया है कि वह पहले अधिकारियों के साथ मिलकर नकली बीजों को सीज करने की कार्रवाई में शामिल होता था, और बाद में अपने भांजों स्वतंत्र और सुनील के माध्यम से संबंधित फर्म के मालिक को डराकर मामला रफा-दफा करने के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही करता था। गौरतलब है कि कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा लंबे समय से विभाग में मिलावटखोरों के खिलाफ धरपकड़ अभियान चला रहे थे, लेकिन उन्हीं की कार्रवाई की आड़ में विभाग के ही एक गिरोह ने अवैध वसूली का यह खेल शुरू कर दिया, जिसमें भाजपा विधायक पब्बाराम बिश्नोई के पीए और जुगल किशोर को गिरफ्तार किया गया है।

    विपक्ष ने सरकार को घेरा और लगाया 500 करोड़ की उगाही का आरोप

    कृषि विभाग के भीतर से संचालित हो रहे इस हाई-प्रोफाइल रिश्वतकांड को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार और कृषि मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) गोविंद सिंह डोटासरा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि जो लोग कृषि मंत्री के साथ रहकर कार्रवाई का मुख्य चेहरा बने हुए थे, वे ही परदे के पीछे करोड़ों रुपये की सौदेबाजी में संलिप्त थे। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सीकर, बीकानेर और श्रीगंगानगर तक फैले इस पूरे नेटवर्क का असली मकसद मिलावट रोकना नहीं, बल्कि व्यापारियों को कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे अवैध वसूली करना था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में डर और धमकी के बल पर छापेमारी की आड़ में लगभग 500 करोड़ रुपये का महाघोटाला किया गया है, और सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी रिश्वत की रकम किस-किस के पास पहुंच रही थी।

    कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने स्वीकारी अपनी चूक, विरोधियों पर किया पलटवार

    कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों पर खुद कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने आगे आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा पर पलटवार करते हुए याद दिलाया कि डोटासरा के पिछले कार्यकाल में 18 में से 17 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। कृषि मंत्री ने जनता के बीच अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने पिछले पांच वर्षों के दौरान लगातार युवाओं और किसानों के हक के लिए तत्कालीन गहलोत सरकार के खिलाफ सड़क पर संघर्ष किया है। उन्होंने भावुक होते हुए अपनी एक कमी को स्वीकार किया कि उनके साथ रहने वाले कुछ लोग उनकी पीठ पीछे इस तरह के गलत काम कर रहे थे, जिसकी उन्हें पहले भनक नहीं लग सकी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही उन्हें इस गड़बड़ी का पता चला, उन्होंने अपने ही करीबियों को संरक्षण देने के बजाय तुरंत उन्हें जेल भिजवाया, क्योंकि उनके नाम पर कोई भी लूटपाट करे, यह वे कभी सहन नहीं कर सकते।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी रहेगी जंग, बेदाग छवि पर आंच नहीं आने दूंगा

    कृषि मंत्री ने विरोधियों को दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि करौली की पावन और ऐतिहासिक भूमि को वे किसी भी कीमत पर कलंकित नहीं होने देंगे। उन्होंने घोषणा की कि विरोधी चाहे उनके खिलाफ कितना भी दुष्प्रचार कर लें या षड्यंत्र रच लें, लेकिन उनके पास ऐसी कोई हथकड़ी नहीं बनी है जो किरोड़ी लाल मीणा के हाथों में डाली जा सके, क्योंकि उनका पूरा जीवन हमेशा से ही बुराइयों और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए बीता है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और विभाग के भीतर मौजूद हर एक भ्रष्ट चेहरे को बेनकाब करके सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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