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    ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की मिसाल, वेनेजुएला की मदद के लिए भारत ने भेजी मेडिकल टीम

    नई दिल्ली। वेनेजुएला में प्राकृतिक आपदा के बाद राहत सामग्री और चिकित्सा दलों को भेजना कोई एकमात्र घटना नहीं है, बल्कि वैश्विक आपदाओं के समय भारत हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी धरती ही एक परिवार है) के अपने शाश्वत संदेश पर अडिग रहा है। पिछले दस वर्षों के कालखंड पर नजर डालें तो भारत ने अपनी सीमाओं से परे जाकर, बिना किसी राजनीतिक लाभ-हानि की चिंता किए, संकट में फंसे देशों की बढ़-चढ़कर सहायता की है। वर्तमान दौर में भारतीय तिरंगा संकटग्रस्त देशों के नागरिकों के लिए जीवन की एक नई उम्मीद और गहरे भरोसे का प्रतीक बन गया है। एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के बावजूद वैश्विक स्तर पर मानवीय मदद पहुंचाने के मामले में भारत का इतिहास दुनिया के कई बड़े और संपन्न देशों से कहीं अधिक बेहतर और अनुकरणीय रहा है।

    नेपाल का महाभूकंप और 'ऑपरेशन मैत्री' की मिसाल

    वर्ष 2015 में जब हमारे पड़ोसी देश नेपाल में इस सदी का सबसे प्रलयंकारी भूकंप आया था, तब भारतीय प्रशासन ने बिना समय गंवाए महज कुछ ही घंटों के भीतर 'ऑपरेशन मैत्री' नामक एक व्यापक बचाव अभियान शुरू कर दिया था। इस मिशन के तहत भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने दिन-रात एक करके मलबे के ढेर से हजारों नागरिकों को जिंदा बाहर निकाला था। भारत ने नेपाल को केवल भारी मात्रा में खाद्य सामग्री, टेंट और दवाइयां ही उपलब्ध नहीं कराईं, बल्कि भूकंप प्रभावित इलाकों में तबाह हो चुके बुनियादी ढांचे, सड़कों और मकानों के पुनर्निर्माण में भी बेहद सक्रिय और सराहनीय भूमिका अदा की थी।

    तुर्की-सीरिया में 'ऑपरेशन दोस्त' और म्यांमार में 'ऑपरेशन ब्रह्मा'

    इसी प्रकार जब तुर्की और सीरिया में विनाशकारी भूकंप ने हाहाकार मचाया, तब भारत सरकार ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाते हुए 'ऑपरेशन दोस्त' का आगाज किया। आपदा वाले क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे जीवन को खोजने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) और वायुसेना के जांबाज गरुड़ कमांडो की टीमें भेजी गईं। इस मिशन में भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल ने विपरीत परिस्थितियों के बीच अस्थाई चिकित्सा केंद्र स्थापित कर चौबीसों घंटे घायलों का इलाज किया, जिसकी वैश्विक स्तर पर खूब सराहना हुई। इसके अलावा पिछले वर्ष म्यांमार में आए भीषण भूकंप के दौरान भी भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' की विदेश नीति का परिचय देते हुए तत्काल 'ऑपरेशन ब्रह्मा' शुरू किया, जिसके जरिए भारतीय वायुसेना और नौसेना के जहाजों से भारी मात्रा में जीवन रक्षक औषधियां, सूखा राशन और बचाव दल वहां भेजे गए थे।

    अफगानिस्तान का मानवीय संकट और भारत की खेलदिली

    बीते साल जब अफगानिस्तान एक साथ राजनीतिक उथल-पुथल और भीषण प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहा था, तब भारत ने सभी प्रकार के राजनीतिक गतिरोधों और कूटनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखा। भूखमरी और तबाही की कगार पर खड़े अफगान नागरिकों की सहायता के लिए भारत की ओर से हजारों टन गेहूं की बड़ी खेप, आपातकालीन चिकित्सा उपकरण और जीवन रक्षक टीके भेजे गए, जिससे वहां पनप रहे एक बहुत बड़े मानवीय संकट को रोकने में सफलता मिली। इस ऐतिहासिक मदद के बाद भी भारत ने समय-समय पर अफगानिस्तान की जनता को जरूरत के मुताबिक हर संभव मानवीय सहायता पहुंचाना जारी रखा है।

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