फुटबॉल की दुनिया में अमूमन बढ़ती उम्र के साथ खिलाड़ियों की गति धीमी होने लगती है, उनका पुराना जादू फीका पड़ने लगता है और मैदान पर उनका असर कम होने लगता है। लेकिन लियोनल मेसी उन गिने-चुने दिग्गजों में शुमार हैं, जिन्होंने समय की मांग के अनुसार अपने खेल को पूरी तरह ढाल लिया है। आज वे पहले की तरह हर वक्त डिफेंडरों को छकाते हुए गोल दागते नजर नहीं आते, बल्कि अपनी असाधारण समझ, गजब के धैर्य और अचूक पासिंग से पूरे मैच का पासा पलट देते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ यह खूबी खुलकर सामने आई। 39 साल के मेसी ने खुद कोई गोल नहीं किया, लेकिन दो जादुई असिस्ट (पास) देकर अर्जेंटीना को लगातार दूसरी और कुल सातवीं बार फाइनल में पहुंचा दिया।
शुरुआती हाफ में काम आई इंग्लैंड की चक्रव्यूह रणनीति
इंग्लैंड के रणनीतिकार थॉमस टुकेल ने मेसी को रोकने के लिए किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय एक पूरा चक्रव्यूह तैयार किया था। मैदान पर इलियट एंडरसन, जूड बेलिंगहम और डेक्लान राइस की तिकड़ी ने मिलकर मेसी के इर्द-गिर्द के स्पेस को पूरी तरह ब्लॉक रखा।
इस तगड़ी घेराबंदी का असर भी देखने को मिला। पहले हाफ में मेसी को खुलकर खेलने या गोल करने का कोई बड़ा मौका नहीं मिला और अर्जेंटीना का आक्रामक विभाग बेअसर नजर आया। इसके बाद दूसरे हाफ की शुरुआत में ही एंथनी गॉर्डन ने शानदार गोल दागकर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। उस समय तक ऐसा लग रहा था कि ब्रिटिश टीम का प्लान पूरी तरह सफल हो रहा है।
मेसी ने बदली अपनी जगह और पलट गया पूरा खेल
बढ़त हासिल करने के बाद इंग्लैंड ने अपनी डिफेंस लाइन को थोड़ा पीछे खींच लिया। इंग्लिश टीम की यही चूक मेसी के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई। मेसी ने भांप लिया कि अब उन्हें बीच के हिस्से से हटकर दाईं विंग (राइट विंग) की तरफ जाना होगा।
जैसे ही वे दाईं ओर खिसके, इंग्लैंड के डिफेंडरों को अपनी तय जगह छोड़नी पड़ी। इसका फायदा यह हुआ कि अर्जेंटीना के बाकी फॉरवर्ड खिलाड़ियों के लिए मैदान पर खाली जगह (स्पेस) बनने लगी। मेसी ने इसी खाली जगह का इस्तेमाल करते हुए एक के बाद एक कई खतरनाक मूव बनाए। उनके पास गेंद आते ही अर्जेंटीना का दबाव बढ़ता गया और इंग्लैंड की टीम अपने ही पेनाल्टी बॉक्स में सिमटने को मजबूर हो गई।
गोल का सूखा, लेकिन दो असिस्ट से पलट दी बाजी
अर्जेंटीना का बराबरी का गोल पूरी तरह से मेसी के विजन और समझदारी का परिणाम था। दाईं ओर गेंद मिलने पर उन्होंने हड़बड़ी में क्रॉस डालने के बजाय सही पल का इंतजार किया। जैसे ही मौका मिला, उन्होंने एंजो फर्नांडीज को एक ऐसा तीखा पास दिया जिसने इंग्लैंड की पूरी डिफेंस लाइन को भेद दिया। एंजो ने बेहतरीन फिनिशिंग दिखाते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
इसके बाद इंजरी टाइम में मेसी ने एक बार फिर अपना करिश्मा दिखाया। उन्होंने बाउंड्री लाइन के पास से गेंद को बाहर जाने से बचाया और एक कमाल का क्रॉस डाला, जिस पर लौटारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर लगाकर टीम को विजयी गोल दिला दिया। दिलचस्प बात यह है कि पूरे मैच में मेसी का एक्सपेक्टेड गोल (xG) सिर्फ 0.01 था, लेकिन उन्होंने चार बड़े मौके बनाए जिसमें से दो गोल में तब्दील हुए।
अब ड्रिब्लिंग नहीं, दिमागी कौशल से जीतते हैं मैच
एक दौर था जब मेसी अपनी रफ्तार और ड्रिब्लिंग के दम पर अकेले ही कई डिफेंडरों को छका देते थे। आज उनकी ड्रिब्लिंग का तरीका और मकसद बदल चुका है। अब वे ड्रिब्लिंग करके विरोधी खिलाड़ियों को अपनी तरफ खींचते हैं, ताकि उनके साथी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का खुला मौका मिल सके।
इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 11 में से 9 सफल ड्रिब्लिंग कीं, लेकिन इनका उद्देश्य खुद गोल करना नहीं बल्कि विपक्षी टीम के डिफेंस के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था। यही उनका हाई फुटबॉल आईक्यू (IQ) दर्शाता है।
अनुभव और युवा जोश का शानदार तालमेल
आज के मेसी बार्सिलोना के उस युवा खिलाड़ी से काफी अलग हैं जो सिर्फ अपनी रफ्तार से दुनिया को हैरान करता था। अब वे हर हमले में बेवजह ऊर्जा बर्बाद नहीं करते, बल्कि सही मौके का इंतजार करते हैं और निर्णायक पलों में मैच का रुख मोड़ देते हैं।
कोच लियोनल स्कालोनी ने भी टीम को इसी रणनीति के तहत ढाला है। एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज, रोड्रिगो डी पॉल और जूलियन अल्वारेज जैसे युवा खिलाड़ी मैदान पर लगातार दौड़-भाग करते हैं, जिससे मेसी अपनी ऊर्जा बचाकर सही समय पर कमान संभाल सकें। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने पूरे 120 मिनट मैदान पर बिताए। इस मैच के साथ ही विश्व कप के इतिहास में उनके असिस्ट की संख्या रिकॉर्ड 12 हो गई है, जबकि छह विश्व कप में उनके कुल 21 गोल उनकी महानता की गवाही देते हैं।
फाइनल में स्पेन की युवा ब्रिगेड से महामुकाबला
इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब फाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन की मजबूत चुनौती से होगा। एक तरफ पिछले दो दशकों से फुटबॉल की दुनिया पर राज करने वाले मेसी होंगे, तो दूसरी तरफ स्पेन की नई पीढ़ी के उभरते सितारे लामिन यामाल, पाउ कुबार्सी और दानी ओल्मो होंगे। इंग्लैंड के खिलाफ इस मैच ने साबित कर दिया है कि मेसी को एक घंटे तक रोक लेना ही काफी नहीं है, उन्हें जैसे ही थोड़ा सा भी मौका मिलेगा, वे अपने अनुभव से पूरे मैच की कहानी बदल देंगे। अब देखना होगा कि स्पेन का मिडफील्ड उन्हें रोक पाता है या मेसी एक बार फिर इतिहास रचते हैं।


