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    चातुर्मास लगते ही इन 3 राशियों के बदलेंगे दिन, आएगा भाग्य का साथ, दूर होंगी परेशानियां

    हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है. इस वर्ष चातुर्मास 6 जुलाई 2025, रविवार से शुरू होकर 1 नवंबर 2025 तक चलेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसी कारण से इस समय मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि वर्जित माने जाते हैं.

    हालांकि, जहां चातुर्मास एक ओर संयम, साधना और त्याग का समय है, वहीं वैदिक ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ आदित्य झा के अनुसार, यह चार महीनों का समय कुछ विशेष राशियों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है. आइए जानते हैं कि चातुर्मास 2025 किन तीन राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है.

    मेष राशि (Aries): आर्थिक मजबूती और नई शुरुआत
    इस राशि के जातकों के लिए चातुर्मास का समय अत्यंत शुभ रहने वाला है. लंबे समय से अटके हुए कार्य पूर्ण हो सकते हैं. बिजनेस डील में लाभ, निवेश से फायदा और करियर में नए अवसरों की प्राप्ति संभव है. पैसों की कमी दूर हो सकती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. यह समय नए लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए अनुकूल है.

    कुंभ राशि (Aquarius): नौकरी, सेहत और संपत्ति में उन्नति
    कुंभ राशि वालों के लिए चातुर्मास वित्तीय दृष्टिकोण से बेहद सकारात्मक रहने वाला है. कार्यक्षेत्र में सुधार, प्रमोशन या नई नौकरी के योग बन सकते हैं. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और पारिवारिक जीवन में संतुलन बना रहेगा. जिन लोगों को कोर्ट-कचहरी या कागजी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें भी राहत मिल सकती है.

    मीन राशि (Pisces): वैवाहिक सुख और भगवत कृपा
    मीन राशि के जातकों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा मानी जा रही है. चातुर्मास के चार महीनों में वैवाहिक जीवन सुखद, प्रेम संबंधों में स्थिरता और परिवार के साथ आत्मीयता बढ़ेगी. यह समय मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी उत्तम रहेगा. धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी और अच्छे कर्मों का फल शीघ्र मिलने की संभावना है.

    चातुर्मास में क्या न करें?
    चातुर्मास एक पवित्र और अनुशासनात्मक काल होता है, जिसमें कुछ चीज़ों से परहेज करना अनिवार्य होता है:

    • मांगलिक कार्यों से परहेज करें (विवाह, गृह प्रवेश आदि)
    • तामसिक भोजन न करें – जैसे प्याज, लहसुन, मांसाहार
    • गुड़, शहद, मूली, बैंगन और परवल जैसी चीज़ें खाने से बचें
    • ब्रह्मचर्य, संयम और नियम पालन करें

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