More
    HomeदेशAsaduddin Owaisi बोले- ‘जन-गण-मन और वंदे मातरम बराबर नहीं’, केंद्र के फैसले...

    Asaduddin Owaisi बोले- ‘जन-गण-मन और वंदे मातरम बराबर नहीं’, केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल

    हैदराबाद/दिल्ली: 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समान वैधानिक दर्जा और सुरक्षा देने के केंद्र सरकार के फैसले ने देश में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस प्रस्ताव पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने ओवैसी के बयानों को 'धार्मिक अलगाववाद' से प्रेरित बताते हुए तीखा पलटवार किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत अब 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।

    ओवैसी के तर्क: "राष्ट्र कोई देवी नहीं, भारत यानी यहाँ के लोग"

    असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान (National Anthem) के बराबर नहीं रखा जा सकता। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

    • धार्मिक स्तुति: ओवैसी के अनुसार, 'वंदे मातरम' मूल रूप से एक देवी की स्तुति है, जबकि भारत का संविधान किसी एक धर्म या देवी-देवता के आधार पर नहीं चलता। उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्र किसी विशेष धर्म का नहीं, बल्कि उसके लोगों का होता है।

    • संविधान का हवाला: उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना "हम भारत के लोग" से शुरू होती है, न कि किसी देवी या ईश्वर के नाम से। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सभा ने उस समय ईश्वर के नाम से प्रस्तावना शुरू करने के सुझावों को खारिज कर दिया था।

    • ऐतिहासिक संदर्भ: ओवैसी ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की सोच पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि गांधी, नेहरू और टैगोर जैसे नेताओं ने भी इसे पूर्ण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार करने में संकोच दिखाया था।

    भाजपा का पलटवार: "वोट बैंक और अलगाववाद की राजनीति"

    ओवैसी के बयान पर तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एआईएमआईएम की विचारधारा को राष्ट्रीय एकता के लिए बाधक बताया:

    • सांस्कृतिक एकीकरण का विरोध: भाजपा का कहना है कि ओवैसी और उनकी पार्टी हर उस प्रयास का विरोध करती है जो देश को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने 'वंदे मातरम' के विरोध को उसी कड़ी का हिस्सा बताया जिसमें समान नागरिक संहिता और तीन तलाक का विरोध शामिल है।

    • जिन्ना से तुलना: रामचंदर राव ने कहा कि ओवैसी की राजनीति मोहम्मद अली जिन्ना की उस अलगाववादी सोच की याद दिलाती है जो अंततः विभाजन का कारण बनी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध केवल वोट बैंक को साधने के लिए किया जा रहा है।

    क्या है नया कानून और इसके मायने?

    केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य 'वंदे मातरम' को वही कानूनी संरक्षण प्रदान करना है जो वर्तमान में 'जन गण मन' को प्राप्त है।

    • कानूनी संरक्षण: अब तक 'जन गण मन' के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर सजा का प्रावधान था। नए संशोधन के बाद 'वंदे मातरम' के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

    • समान दर्जा: सरकार का तर्क है कि स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' की भूमिका अद्वितीय रही है, इसलिए इसे राष्ट्रीय प्रतीकों के समान सम्मान मिलना चाहिए।

    इस कानूनी बदलाव ने जहाँ राष्ट्रवाद के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है, वहीं अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक परिभाषाओं को लेकर एक गंभीर वैचारिक संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here