कोटा। राजस्थान के प्रमुख शिक्षा केंद्र कोटा में बीते मंगलवार की रात सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आगमन हुआ। यहां स्थानीय सर्किट हाउस में उपस्थित पत्रकारों और मीडिया कर्मियों से औपचारिक चर्चा के दौरान उन्होंने केंद्र तथा राज्य की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में देश एक बेहद पेचीदा और गंभीर संकटपूर्ण दौर से होकर गुजर रहा है, जहां आम जनता की बुनियादी समस्याओं और तकलीफों की प्रशासनिक स्तर पर ठीक ढंग से कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधा आरोप मढ़ा कि शासन के स्तर पर आम नागरिकों की जायज शिकायतों, मांगों और रोजमर्रा के अहम मुद्दों को पूरी तरह से नजरअंदाज और हाशिए पर धकेला जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कतई उचित नहीं है।
राज्य की धीमी प्रशासनिक गति और जनता में पनपता भारी असंतोष
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान की मौजूदा प्रशासनिक मशीनरी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदेश में भी आम जनता की रोजमर्रा की दिक्कतों का निस्तारण उस गति और संवेदनशीलता से नहीं हो पा रहा है जिसकी उम्मीद एक चुनी हुई सरकार से की जाती है। जनसमस्याओं के समाधान की यह सुस्त और अपेक्षित रफ्तार ही है, जिसके चलते आज राज्य के नागरिकों के भीतर वर्तमान व्यवस्था के प्रति अविश्वास और असंतोष का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा।
नीतियों और प्रशासनिक ढांचे की खामियों पर तीखे सवाल
अशोक गहलोत ने सत्ताधारी दल की बुनियादी नीतियों और मौजूदा प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उन्होंने पुरजोर तरीके से इस बात को रेखांकित किया कि सरकार को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को किनारे रखकर जनहित से जुड़े असल और धरातलीय मुद्दों पर अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करने की महती आवश्यकता है। बीजेपी पर हमलावर रुख अपनाते हुए उन्होंने दावा किया कि मौजूदा दौर में शासन-प्रशासन के हर छोटे-बड़े स्तर पर कई बड़ी खामियां और विसंगतियां सरेआम देखने को मिल रही हैं, जिससे आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
गहलोत के बयानों से मरुधरा के सियासी गलियारों में मची खलबली
कोटा प्रवास के दौरान हुई इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य, अंदरूनी समीकरणों और जनहित से जुड़े विभिन्न ज्वलंत विषयों पर बड़ी ही बेबाकी से अपना पक्ष रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा सीधे तौर पर डबल इंजन सरकार की घेराबंदी किए जाने के बाद से राज्य के राजनीतिक हलकों और गलियारों में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो गया है। उनके इस आक्रामक रुख को आने वाले समय में विपक्ष की नई रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।


