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    सावधान श्रद्धालु! सलकनपुर मंदिर के नाम पर हो रही अवैध चंदा वसूली, ट्रस्ट ने जारी की चेतावनी

    सीहोर। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चंदा और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर चल रही बहसों के बीच मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन धाम सलकनपुर भी अचानक सुर्खियों में आ गया है। मंदिर प्रबंधन ने ग्रामीण इलाकों में फर्जी रसीदें छपवाकर माताजी के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक सक्रिय गिरोह को लेकर श्रद्धालुओं के लिए बेहद जरूरी और सख्त चेतावनी जारी की है। इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की पारदर्शिता और उसके सार्वजनिक ऑडिट को लेकर पुराना सियासी विवाद भी एक बार फिर से गर्मा गया है।

    भंडारे और माताजी के नाम पर नकली रसीदों से अवैध वसूली का भंडाफोड़

    सलकनपुर देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर सनसनीखेज खुलासा किया है कि कुछ असामाजिक तत्व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गाड़ियों से घूम-घूमकर मां विजयासन धाम में महाप्रसाद और भंडारा आयोजित कराने का झांसा दे रहे हैं। ये जालसाज लोग ग्रामीणों को नकली रसीदें थमाकर उनसे मोटी नकद राशि और भारी मात्रा में अनाज दान के रूप में वसूल रहे हैं। इस संबंध में लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए ट्रस्ट ने साफ किया है कि मंदिर प्रशासन ने गांव-गांव जाकर चंदा इकट्ठा करने के लिए किसी भी व्यक्ति, संस्था या वाहन को अधिकृत नहीं किया है।

    धोखाधड़ी से बचने के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों से ही दान करने की पुकार

    श्रद्धालुओं की आस्था के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए ट्रस्ट अध्यक्ष ने सभी भक्तों से भावुक अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत और संदिग्ध व्यक्ति को माताजी के नाम पर एक भी रुपया या अन्न न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भक्त अपनी मर्जी से दान करना चाहता है, तो वह केवल मंदिर परिसर के अंदर बने अधिकृत दान काउंटर पर जाकर पक्की रसीद प्राप्त करे या फिर सीधे ट्रस्ट के रजिस्टर्ड बैंक खाते में ऑनलाइन माध्यम से राशि ट्रांसफर करे। श्रद्धालुओं को सतर्क करने के लिए अब पूरे मंदिर परिसर में विशेष जागरूकता बोर्ड भी स्थापित कर दिए गए हैं।

    करोड़ों के चढ़ावे की पारदर्शिता पर विपक्ष के सवाल और आरटीआई पर रार

    सलकनपुर धाम प्रदेश के सबसे संपन्न देवी मंदिरों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर सोने-चांदी के आभूषण और कीमती वस्त्र चढ़ाते हैं। इसी वजह से यहां की कुल आय और व्यय का विवरण सार्वजनिक करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने पूर्व में मंदिर समिति की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से इस पूरे चढ़ावे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। इसके साथ ही कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी जाने के बावजूद मंदिर प्रबंधन द्वारा दानराशि का पूरा विवरण आसानी से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

    एक-एक रुपये के वित्तीय रिकॉर्ड का पुख्ता हिसाब होने का ट्रस्ट का दावा

    विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं के इन तमाम आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज करते हुए ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने कहा कि मंदिर का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा लिखित रूप में व्यवस्थित है। सरकारी निगरानी में गठित समिति पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ एक-एक रुपये का हिसाब रखती है। आरटीआई के मसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जानकारी हासिल करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सरकारी शुल्क का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्थापित नियमों का पालन किए बिना केवल अफवाहें उड़ाकर और भ्रम फैलाकर मंदिर की छवि को धूमिल करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।

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