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    भरतपुर में जल संकट पर रामकिशन व इन्दल सिंह का बयान: पानी का प्रबंध हो प्राथमिकता

    पूर्व सांसद रामकिशन और किसान नेता इन्दल सिंह ने भरतपुर में गंभीर जल संकट पर सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की। गम्भीर नदी पर बांध, यमुना जल और सिंचाई तंत्र सुधार की बात कही।

    मिशनसच न्यूज, भरतपुर।
    भरतपुर जिले में लगातार बढ़ते जल संकट को लेकर पूर्व सांसद एवं शताब्दी पुरुष पंडित रामकिशन और प्रख्यात किसान नेता इन्दल सिंह जाट ने सरकार को कड़े शब्दों में चेताया है। दोनों नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि भरतपुर जिले में पानी का संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिख रहे। उन्होंने कहा कि यदि अब भी पानी को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाले दिनों में सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है।

    पूर्व सांसद रामकिशन ने कहा कि प्रदेश में पानी को लेकर राजनीतिक चुप्पी बनी हुई है, जबकि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं, संवेदनशीलता और तात्कालिक समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन भरतपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट जस का तस बना हुआ है। यहाँ इतना पानी उपलब्ध हो सकता है कि पूरे जिले की जरूरतें पूरी की जा सकें, मगर इसके लिए मजबूत नीति और इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।

    इन्दल सिंह जाट ने कहा कि गम्भीर नदी का पानी आज भी बेकार बहकर उत्तर प्रदेश सीमा में चला जाता है, जिसका उपयोग भरतपुर जिले में सिंचाई और पेयजल दोनों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि गम्भीर नदी पर या तो बड़ा बांध बनाया जाए या उपयुक्त स्थान पर एनीकट तैयार किया जाए, ताकि पानी को रोका जा सके और उसका सदुपयोग स्थानीय किसानों और ग्रामीणों तक पहुँच सके। उन्होंने कहा कि पंचना बांध और गम्भीर नदी के जल प्रबंधन को मजबूत किए बिना जल संकट खत्म नहीं होगा।

    दोनों नेताओं ने मांग की कि ग्राम कलसाड़ा के पास गम्भीर नदी पर बड़ा बांध या एनीकट बनना अत्यंत आवश्यक है। इसके बनने से वैर, भुसावर, बयाना और महुआ क्षेत्र के कई गाँवों में सिंचाई व्यवस्था सुधर जाएगी। खासतौर पर बल्लभगढ़ और सलेमपुर कला क्षेत्र के दर्जनों गाँव पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जिससे खेती बड़ी मात्रा में बंजर पड़ी हुई है। यह स्थिति एक बड़े आर्थिक संकट को जन्म दे रही है, जिसे जल्द कदम उठाकर ही रोका जा सकता है।

    पूर्व सांसद रामकिशन ने यह भी कहा कि यमुना जल समझौते के तहत भरतपुर को मिलने वाले पानी का पूरा उपयोग नहीं हो रहा, जबकि जिले की कई ग्राम पंचायतें पानी के इंतजार में परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यमुना का पानी भरतपुर तहसील के सूती, फुलवाड़ा, नगला परशुराम, इकरन और पीपला तक जल्द से जल्द पहुंचाया जाना चाहिए। यदि सरकार समझौते के अनुसार द्वितीय चरण का पानी लेना शुरू कर दे, तो डीग और भरतपुर के अनेक गाँवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    इन्दल सिंह जाट ने कहा कि भरतपुर का भूगोल और कृषि क्षेत्र पानी पर निर्भर है। यहाँ के किसान सिंचाई साधनों के अभाव में खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन सही हो जाए, तो भरतपुर जिले में कृषि उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।

    अंत में दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि पानी का संघर्ष अभी जारी रहेगा, और वे इस मुद्दे को लेकर जल्द ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को विस्तृत पत्र भी भेजेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भरतपुर जिले के जल संकट को प्राथमिकता में रखकर त्वरित और ठोस कदम उठाएगी।

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