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    भोपाल बना मेडिकल इनोवेशन का हब, देश की पहली टेली-रोबोटिक यूनिट ने किया कमाल

    भोपाल। भारत में बनी पहली मोबाइल टेली रोबोटिक सर्जरी यूनिट एसएसआई मंत्रा एम राजधानी भोपाल पहुंची। शहर के एक नजी अस्पताल में एक महिला की बच्चेदानी निकालने की सर्जरी (हिस्ट्रैक्टोमी)  की गई। जिसमें मरीज ओटी में थी, जबकि ऑपरेटिंग सर्जन बस में लगे टेली रोबोटिक कंसोल पर मौजूद थीं। यह सर्जरी डॉ. प्रिया भावे चित्तावर और उनकी टीम द्वारा की गईं। डॉ. चित्तवार के अनुसार, यह मध्य भारत में महिलाओं पर की गई पहली टेली-रोबोटिक सर्जरी और भारत में दूसरी ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सर्जन दूरस्थ कंसोल से रोबोट को नियंत्रित करते हैं और ओटी में रोबोट वास्तविक सर्जरी करता है। नियंत्रण पूरी तरह सर्जन के हाथ में रहता है। बस के भीतर लगे कंसोल से सर्जन ने इंस्ट्रूमेंट आर्म्स को कंट्रोल किया, जबकि ओटी के भीतर रोबोट ने सटीक मूवमेंट्स से टिश्यू डिसेक्शन और हेमोस्टेसिस को अंजाम दिया। कैंपस में आए डॉक्टरों और पीजी विद्यार्थियोंं ने लाइव-फीड पर प्रक्रिया देखी और सिस्टम की बारीकियों को समझा।

    विशेषज्ञों की कमी वाले क्षेत्रों में भी होगी क्वालिटी सर्जरी

    मोबाइल टेली-रोबोटिक यूनिट एसएस इनोवेशन ने विकसित की है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां रोबोटिक सर्जरी की पहुंच कम है, वहां टेक्नोलॉजी को मरीज तक ले जाना। टीम का विजन ऐसा नेटवर्क बनाना है कि भोपाल के विशेषज्ञ जरूरत पड़ने पर किसी दूरस्थ जिले के ओटी में रोबोट के जरिए सर्जरी कर सकें। इससे विशेषज्ञों की कमी वाले क्षेत्रों में भी क्वालिटी सर्जरी, समय पर उपलब्ध हो सकेगी।

    700 किमी का सफर पर है यूनिट

    जानकारी के मुताबिक यह रोबोटिक सर्जिकल यात्रा 21 अगस्त को गुरुग्राम से शुरू हुई है। भोपाल के बाद यूनिट इंदौर और फिर जबलपुर जाएगी। कुल 9 दिनों में लगभग 700 किमी का सफर तय करते हुए यह बस कई शहरों में रुकेगी, जहां डॉक्टर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स और हेल्थ-स्टाफ के लिए लाइव डेमो और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है।

    जाने क्या है टेली-रोबोटिक सर्जरी

    1- सर्जन OT में मौजूद न हो तो भी लो-लेटेंसी कनेक्टिविटी (फाइबर,5G या समर्पित नेटवर्क) के माध्यम से कंसोल से रोबोटिक आर्म्स को चलाते हैं।
    2- 3D हाई-डेफिनिशन विजन और फाइन मूवमेंट से सूक्ष्म कट, कम खून बहाव और बेहतर टिश्यू प्रिजर्वेशन संभव होता है।
    3- छोटे चीरे और कम ट्रॉमा से कम दर्द, कम अस्पताल में रहने की अवधि, और रोगी की जल्दी वापसी संभव।
    4- छोटे शहरों/जिलों में बैठे मरीज को मेट्रो-लेवल विशेषज्ञता मिल सकती है। यात्रा, खर्च और देरी, तीनों घटते हैं।
     

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