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    Homeराज्ययूपीसाहित्यकार के घर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष, दही-जलेबी के साथ हुई आत्मीय मुलाकात

    साहित्यकार के घर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष, दही-जलेबी के साथ हुई आत्मीय मुलाकात

    लखनऊ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने मशहूर साहित्यकार डॉ. विद्या बिंदु सिंह के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। तय समय से थोड़ा लेट होने के कारण नितिन नवीन ने सुबह करीब 11:27 बजे वहां पहुंचते ही हाथ जोड़कर देरी के लिए माफी मांगी। इस दौरान उनके साथ यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने वहां जुटे साहित्यकारों का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और करीब 20 मिनट तक अनौपचारिक बातचीत की। इस खास मुलाकात के दौरान प्रख्यात लोकगायिका मालिनी अवस्थी भी वहां मौजूद रहीं।

    बैठक के दौरान लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने दोनों विशिष्ट मेहमानों को पारंपरिक पटका पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    100 से ज्यादा कृतियों की रचना कर चुकी हैं डॉ. विद्या बिंदु सिंह

    डॉ. विद्या बिंदु सिंह देश की जानी-मानी लेखिका और साहित्यकार हैं, जिन्होंने हिंदी और अवधी भाषा में 100 से अधिक कविताएं, कहानियां और लोकगीत लिखे हैं। उनकी रचनाओं में सबसे अधिक लोकगीत रक्षाबंधन के त्योहार पर आधारित हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें साल 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'हिंदी गौरव सम्मान' और साल 2022 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' पुरस्कार से नवाजा गया था। अयोध्या के जैतपुर में जन्मीं विद्या बिंदु सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमए और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

    दही-जलेबी के साथ जमी बैठकी, नहीं हुई कोई सियासी बात

    नितिन नवीन के साथ हुई इस मुलाकात के बाद बाहर आईं लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने बातचीत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की सादगी की तारीफ करते हुए कहा कि नितिन नवीन ने बेहद सहजता के साथ सभी से बातचीत की। उन्होंने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद साहित्यकारों और कलाकारों के लिए समय निकाला और हमारी दीदी विद्या बिंदु सिंह के घर पर एक पारंपरिक 'बैठकी' के अंदाज में वक्त बिताया।

    मालिनी अवस्थी ने बताया कि इस बैठकी के दौरान मेहमानों ने लखनऊ की मशहूर दही-जलेबी का स्वाद लिया। पूरी बातचीत के दौरान सिर्फ लखनऊ के खान-पान, यहां के रहन-सहन और समृद्ध संस्कृति पर ही चर्चा हुई; नेताओं ने यहाँ किसी भी तरह की कोई राजनीतिक बात नहीं की।

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