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    खर्च की रफ्तार पर CAG की चिंता, 93 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधूरा

    पटना: बिहार की वित्तीय स्थिति और बजटीय प्रबंधन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बिहार विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में सरकारी खर्चों की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक विभिन्न विभागों द्वारा खर्च किए गए करीब 93 हजार करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूटीलाइज़ेशन सर्टिफिकेट) जमा नहीं किया गया है।

    18 महीने की समय-सीमा का उल्लंघन और 26 फीसदी की बढ़ोतरी

    बिहार कोषागार संहिता-2011 के प्रावधानों के अनुसार, विकास कार्यों व योजनाओं के लिए जारी की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र 18 महीने के भीतर जमा करना अनिवार्य होता है। कैग रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों की कुल राशि में लगभग 26 प्रतिशत का उछाल आया है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और वित्तीय जोखिम का खतरा बढ़ जाता है।

    पंचायती राज और शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा बकाया

    कैग के आंकड़ों के मुताबिक, उपयोगिता प्रमाण पत्र न सौंपने के मामले में पंचायती राज विभाग सबसे आगे है, जहां लगभग 32 हजार करोड़ रुपये का हिसाब लंबित है। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के करीब 19 हजार करोड़, नगर विकास एवं आवास विभाग के 17.8 हजार करोड़, ग्रामीण विकास विभाग के 6.4 हजार करोड़ तथा स्वास्थ्य विभाग के लगभग 3 हजार करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा होना बाकी हैं। सीएजी ने इन विभागों में निगरानी तंत्र को तुरंत दुरुस्त करने की जरूरत बताई है।

    बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा रहा बिन खर्च

    रिपोर्ट में राज्य सरकार के बजट प्रबंधन की कमियों को भी उजागर किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य का कुल बजट 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, लेकिन सरकार इसमें से केवल 2.87 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। नतीजतन, कुल बजट का 21.22 फीसदी यानी करीब 77,340 करोड़ रुपये बिना इस्तेमाल के रह गया। कैग ने कहा है कि वित्त विभाग को जनवरी 2026 तक इस संबंध में स्पष्टीकरण देने को कहा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला, जो बजटीय अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच बेहतर समन्वय की कमी को दर्शाता है।

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