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    क्या रेडिएशन से बचा सकती है कोई दवा? मिडिल ईस्ट तनाव के बीच परमाणु हमले का डर बढ़ा

    रेडिएशन से बचाव के लिए पोटैशियम आयोडाइड की डिमांड बढ़ी, जानिए कितनी कारगर है यह दवा

    भारत। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद पर्शियन गल्फ क्षेत्र के हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते इस तनाव के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंका की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। ऐसे माहौल में लोगों के मन में परमाणु हमलों और उससे होने वाले रेडिएशन को लेकर डर बढ़ गया है।

    इसी डर के चलते दुनिया के कई देशों में पोटैशियम आयोडाइड नामक दवा की मांग अचानक बढ़ गई है। माना जाता है कि यह दवा परमाणु हमले या रेडियोएक्टिव दुर्घटना के बाद शरीर को रेडिएशन से कुछ हद तक बचाने में मदद कर सकती है।

    परमाणु हमले के बाद क्या होता है?

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार किसी परमाणु दुर्घटना या हमले की स्थिति में वातावरण में रेडियोएक्टिव आयोडीन फैल सकता है। यह हवा के साथ फैलकर मिट्टी, पानी और भोजन को भी दूषित कर सकता है। कई बार यह त्वचा और कपड़ों पर भी जम जाता है, जिससे शरीर को बाहरी रेडिएशन का खतरा पैदा हो सकता है।

    अगर रेडियोएक्टिव पदार्थ त्वचा पर लग जाए तो उसे गर्म पानी और साबुन से धोकर काफी हद तक हटाया जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब रेडियोएक्टिव आयोडीन सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है या दूषित भोजन और पानी के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंच जाता है।

    मानव शरीर आयोडीन को स्वाभाविक रूप से थायरॉयड ग्रंथि में जमा करता है। ऐसे में रेडियोएक्टिव आयोडीन भी थायरॉयड में जमा हो सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

    कौन सी दवा मदद कर सकती है?

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपात स्थितियों के लिए आवश्यक दवाओं की एक सूची जारी की है, जिसमें पोटैशियम आयोडाइड का नाम भी शामिल है। यह दवा थायरॉयड ग्रंथि को रेडियोएक्टिव आयोडीन को अवशोषित करने से रोकने में मदद कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पोटैशियम आयोडाइड की गोलियां थायरॉयड को सामान्य आयोडीन से भर देती हैं, जिससे रेडियोएक्टिव आयोडीन के शरीर में जमा होने की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा कुछ दवाएं शरीर से रेडियोएक्टिव तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद कर सकती हैं।

    पूरी सुरक्षा का उपाय नहीं

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दवाएं रेडिएशन के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती हैं, लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षा का उपाय नहीं हैं। परमाणु या रेडिएशन आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहना और सरकारी निर्देशों का पालन करना ही सबसे प्रभावी बचाव माना जाता है।

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