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    Homeदुनियाचीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन

    चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन

    वॉशिंगटन। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने अपनी नई रिपोर्ट ‘चैलेंजेस टू सिक्योरिटी इन स्पेस’ में चीन के एक गुप्त रीयूजेबल स्पेसप्लेन की पहली स्पष्ट सैटेलाइट तस्वीर जारी की है, जिसने अमेरिकी सुरक्षा रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा ली गई इस तस्वीर से स्पष्ट होता है कि चीन पृथ्वी की कक्षा में अपनी सैन्य और अंतरिक्ष क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। यह रहस्यमयी स्पेसक्राफ्ट अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक्स-37बी (X-37B) विमान जैसा दिखाई देता है।

    जासूसी सैटेलाइट्स की संख्या में तीन गुना इजाफा

    रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास वर्तमान में 510 से अधिक जासूसी सैटेलाइट्स मौजूद हैं, जो 2018 की तुलना में तीन गुना अधिक हैं। जारी की गई हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर में एक छोटा शटल-नुमा स्पेसक्राफ्ट दिख रहा है, जिसमें छोटे पंख, दो वर्टिकल टेल, खुला पेलोड बे और पिछले हिस्से में सोलर पैनल्स लगे हुए हैं। डीआईए के मुताबिक, यह क्राफ्ट अंतरिक्ष में किसी वस्तु को तैनात करने और परीक्षण के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौटने में सक्षम है, हालांकि यह शैनलांग है या तेंगयुन, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    दिशा बदलने और खुफिया जानकारी जुटाने में माहिर

    अमेरिकी रक्षा एजेंसियां और थिंक टैंक इस विमान की कक्षा में दिशा बदलने (Maneuverability) की क्षमता से सबसे ज्यादा सतर्क हैं। जहां सामान्य सैटेलाइट्स आसानी से अपनी कक्षा नहीं बदल पाते, वहीं यह स्पेसप्लेन कक्षा में घूमते हुए खुफिया जानकारी जुटाने और अन्य स्पेसक्राफ्ट्स के करीब जाकर ऑपरेशन चलाने की क्षमता रखता है। हालांकि इसमें किसी हथियार या आक्रामक मिशन के सीधे सबूत नहीं मिले हैं, फिर भी इसकी क्षमताएं सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    2020 से अब तक चार सफल ऑर्बिटल मिशन

    चीन वर्ष 2020 से अब तक अपने रीयूजेबल स्पेसप्लेन के चार ज्ञात ऑर्बिटल मिशन आयोजित कर चुका है। इसका तीसरा मिशन 14 दिसंबर 2023 से 6 सितंबर 2024 तक चला था, जिसके दौरान इसने अंतरिक्ष में कई छोटी वस्तुएं भी छोड़ी थीं। इसके बाद 7 फरवरी 2026 को चीन ने अपना चौथा मिशन शुरू किया था। यह स्पेसक्राफ्ट फिलहाल लगातार अंतरिक्ष की कक्षा में चक्कर लगा रहा है, जिस पर अमेरिकी एजेंसियां लगातार निगरानी रख रही हैं।

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