धाराशिव। महाराष्ट्र के कई जनपदों में मानसूनी वर्षा की भारी कमी के कारण निर्मित हुए गंभीर सूखाग्रस्त संकट पर राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने धाराशिव जनपद के कळंब तालुका स्थित येरमाळा क्षेत्र का दौरा कर संकटग्रस्त फसलों एवं प्रभावित किसानों की वर्तमान स्थिति का धरातलीय अवलोकन किया। इसके उपरांत उन्होंने राज्य प्रशासन पर अन्नदाताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए तत्काल विशेष राहत पैकेज जारी करने की जोरदार मांग उठाई।
धाराशिव जिले में अल्पवृष्टि का प्रभाव अत्यंत भयावह है। आधिकारिक आंकलनों के अनुसार, जिले में दीर्घकाल से वर्षा न होने के कारण कृषि फसलों को 80 से 85 प्रतिशत तक का अभूतपूर्व नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है।
'खेतों में कुछ शेष नहीं, सोयाबीन की फसल पूर्णतः नष्ट'
येरमाळा में पीड़ित किसानों से संवाद के उपरांत रोहित पवार ने कहा कि खेतों में अब कुछ भी शेष नहीं बचा है। मुख्य रूप से सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने मांग रखी कि प्रभावित किसानों को कम से कम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर की दर से अंतरिम वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि विगत वर्ष की अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा भी अनेक किसानों को अब तक पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो सका है। सरकार द्वारा ₹17,500 प्रति हेक्टेयर की बीमा राशि देने का आश्वासन दिया गया था, किंतु धरातल पर किसानों को मात्र ₹1,000 से ₹12,000 तक की आंशिक राशि ही प्राप्त हुई है। उन्होंने लंबित फसल बीमा एवं सूखा राहत राशि अविलंब हस्तांतरित करने का आग्रह किया।
43 लाख किसान अभी भी सरकारी सहायता के प्रतीक्षारत
ऋणमुक्ति (कर्जमाफी) योजना पर राज्य सरकार की घेराबंदी करते हुए उन्होंने दावा किया कि अब तक केवल 12 लाख किसानों को ही इसका लाभ मिल सका है, जबकि लगभग 43 लाख किसान आज भी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने बल देकर कहा कि कृषकों को केवल ऋणमाफी ही नहीं, अपितु वर्तमान फसल क्षति हेतु भी तुरंत नकद सहायता दी जानी चाहिए। वर्षा के अभाव में फसलों के साथ-साथ पशुपालन पर भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हरे चारे एवं पेयजल की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है।
पशुओं के लिए चारा छावनी और मजदूर परिवारों हेतु ₹25,000 की मांग
विद्यमान परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए रोहित पवार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल 'चारा छावनियां' स्थापित करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, खेतों में रोजगार गंवा चुके भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों हेतु ₹25,000 की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई।
उनका कहना था कि जब कृषि कार्य ठप हो जाएगा, तो खेत मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। अतः राज्य सरकार को कृषकों के साथ-साथ ग्रामीण मजदूरों के पुनर्वास हेतु व्यापक राहत ढांचा तैयार करना चाहिए।
'पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार तुरंत ले निर्णय'
रोहित पवार ने पड़ोसी राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कृषि संकट से निपटने हेतु त्वरित प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सूखा स्थिति पर चर्चा हेतु विशेष विधानसभा सत्र आहूत किया जा रहा है, तो महाराष्ट्र सरकार 5 अक्टूबर तक का प्रतीक्षा समय क्यों ले रही है। यदि केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के तहत वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, तो राज्य सरकार को तत्काल एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार ने 5 अक्टूबर से प्रभावित क्षेत्रों में 'पंचनामा' (फसल क्षति का भौतिक आकलन) प्रारंभ करने की घोषणा की है।
प्रभावित कृषक परिवारों के विद्यार्थियों की फीस माफ करने की अपील
उन्होंने रेखांकित किया कि इस दैवीय आपदा का प्रभाव केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण आय में गिरावट आने से विद्यार्थियों की शिक्षा भी बाधित हो रही है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रभावित परिवारों के छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक फीस माफ करने की पुरजोर मांग की।
राज्य सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कम वर्षा वाले सभी मंडलों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वस्त किया है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत प्रदान करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का मूल्यांकन द्रुत गति से जारी है।
इस मध्य, एनसीपी (शरद पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने भी मुख्यमंत्री को औपचारिक पत्र प्रेषित कर महाराष्ट्र के प्रभावित जनपदों को आधिकारिक रूप से 'सूखाग्रस्त' घोषित करने, तत्काल कर्जमाफी लागू करने, चारा-पेजल की व्यवस्था करने तथा विद्यार्थियों की फीस माफ करने का आग्रह किया है।


