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    आदिवासियों के घर तोड़ने के मामले में CM मोहन यादव ने लिया संज्ञान, होगी जांच

    सीहोर| मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में 12 आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है. इस घटना की उच्च स्तरीय जांच मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कराई जाएगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जांच के आदेश दिए जाने की बात कही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नेता ने इस पर संज्ञान लिया है, तो जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो जाएगा. उन्होंने दोहराया कि वर्तमान सरकार पूरी तरह संवेदनशील है.

    जनजाति आयोग की सख्ती और नोटिस

    राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पूरी घटना का स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित सभी संबंधित प्रमुख अधिकारियों को औपचारिक नोटिस जारी कर आगामी 3 दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

    वरिष्ठ नेताओं द्वारा उठाया गया मुद्दा

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के कोसमी गांव पहुंचकर पीड़ित 12 आदिवासी परिवारों से प्रत्यक्ष मुलाकात की थी. पीड़ितों से मिलने के बाद उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों के बरसों पुराने आशियाने उजाड़ दिए गए और उनके कुओं को भी मिट्टी से पाट दिया गया. उन्होंने इस कदम को जुर्म की पराकाष्ठा करार देते हुए दोषियों को बख्शे जाने की बात से इनकार किया. साथ ही, उन्होंने इस घटना की पूरी जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी दी थी.

    घटना का पूरा विवरण और पृष्ठभूमि

    यह पूरा घटनाक्रम सीहोर के अंतर्गत आने वाले कोसमी गांव का है, जहां वन विकास निगम द्वारा कार्रवाई करते हुए 12 आदिवासी परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया था. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह भूमि पहले राज्य वन विकास निगम को आवंटित की गई थी और उस समय वहां कोई अतिक्रमण नहीं था, बल्कि जमीन पर प्लांटेशन (पौधरोपण) किया गया था.

    वर्ष 2022 के दौरान कुछ आदिवासी परिवारों ने उस प्लांटेशन को हटाकर वहां खेती करना आरंभ कर दिया था. इसके उपरांत, संबंधित परिवारों को प्रशासनिक नोटिस जारी किए गए और अंततः निर्धारित प्रक्रिया के तहत घरों को हटाने की यह कार्रवाई अमल में लाई गई.

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