नई दिल्ली: पड़ोसी देश चीन ने एक बार फिर भारत के व्यापारिक हितों को बड़ा झटका दिया है। ड्रैगन ने भारत से आयात होने वाले 'सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर' पर अगले पांच साल तक के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty) को और आगे बढ़ा दिया है। इस सख्त फैसले के दायरे में भारतीय उद्योगपति अनिल अग्रवाल की प्रमुख कंपनी भी शामिल है। इससे पहले भी चीन ने जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गनिज्म (GMO) नियमों का हवाला देते हुए भारत के 7 प्रमुख चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव बना हुआ है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने पांच साल के लिए बढ़ाई एंटी-डंपिंग ड्यूटी
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि शुक्रवार से भारत से आने वाले सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर पर अगले पांच वर्षों तक एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की नीति जारी रखी जाएगी। यह बड़ा निर्णय ठीक एक साल पहले शुरू की गई 'सनसेट रिव्यू' (अवधि समाप्ति समीक्षा) प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद लिया गया है।
इस प्रशासनिक समीक्षा के दौरान यह निष्कर्ष निकाला गया कि यदि इन एंटी-डंपिंग शुल्कों या पाबंदियों को समाप्त कर दिया जाता है, तो भारतीय उत्पादों की डंपिंग फिर से शुरू हो सकती है, जिससे चीनी घरेलू ऑप्टिकल फाइबर उद्योगों को भारी व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि चीन ने सबसे पहले अगस्त 2014 में भारतीय सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर पर यह शुल्क लगाया था, जिसे बाद में साल 2020 में पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया था।
अनिल अग्रवाल की कंपनी और अन्य निर्यातक आए जद में
इस बार भी विभिन्न भारतीय निर्यातकों के लिए कर (टैक्स) की दरें पूर्ववत नियमों के अनुसार ही रहेंगी, जो 7.4 प्रतिशत से लेकर 30.6 प्रतिशत के दायरे में तय की गई हैं। इन प्रभावित कंपनियों में स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (Sterlite Technologies) शामिल है, जिस पर 7.4% की दर लागू है, जबकि अक्ष ऑप्टिफाइबर और फिनोलेक्स केबल्स के लिए यह दर 30.6% निर्धारित की गई है। आपको बता दें कि स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज देश के दिग्गज उद्योगपति और अरबपति अनिल अग्रवाल से जुड़ी हुई है।
कारोबारी हलकों के अनुसार, अनिल अग्रवाल इस कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस प्रमुख कंपनी का पूरा प्रबंधन और नियंत्रण अग्रवाल परिवार के हाथों में ही है, जिसमें प्रवीण अग्रवाल वाइस चेयरमैन के रूप में और अंकित अग्रवाल मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कामकाज संभाल रहे हैं। चीन के इस एकतरफा और कड़े कदम से भारतीय ऑप्टिकल फाइबर निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।


