फरीदकोट। पंजाब के 28 मेडिकल और डेंटल संस्थानों में सत्र 2026 के तहत होने वाले एनआरआई (NRI) कोटे के दाखिले पर अस्थाई रोक लग गई है। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) ने हाईकोर्ट में जारी कानूनी विवाद के चलते एमबीबीएस (MBBS) की 214 और बीडीएस (BDS) की 217 आरक्षित सीटों की अलॉटमेंट प्रक्रिया को फिलहाल मुल्तवी कर दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, एनआरआई सीटों के आवंटन की आगे की कार्रवाई अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। गौरतलब है कि प्रथम चरण की काउंसलिंग में 47 एमबीबीएस और 3 बीडीएस सीटें बांटी जा चुकी थीं, जिसके बाद इस पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया गया।
बुआ के हलफनामे पर उपजा विवाद
पूरा विवाद एक आवेदक द्वारा दायर याचिका के बाद शुरू हुआ। अभ्यर्थी का दावा है कि अमेरिका में रह रही उसकी सगी बुआ ने नियमानुसार शपथ पत्र दाखिल किया था, लेकिन यूनिवर्सिटी ने उसे एनआरआई श्रेणी के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। याचिकाकर्ता ने प्रॉस्पेक्टस के नियमों और मई में जारी नोटिस का हवाला देते हुए खुद को एनआरआई रिश्तेदारों की देखरेख में पला-बढ़ा उम्मीदवार बताया और पात्रता की मांग की।
214 सीटों के मुकाबले मिले मात्र 63 आवेदन
अदालत में सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी ने बताया कि 214 एमबीबीएस सीटों के लिए महज 63 अभ्यर्थियों ने ही फॉर्म भरा है। आवेदनों की इस बेहद कम संख्या को देखते हुए हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को खाली पड़ी सीटों के समायोजन पर विचार करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए।
अदालत के अगले आदेश तक रोक
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद यूनिवर्सिटी ने एनआरआई काउंसलिंग की प्रक्रिया को आगामी निर्देशों तक रोक दिया है। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि माननीय अदालत का फैसला आने के बाद ही अगली मेरिट सूची और दाखिला प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


