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    तमिलनाडु BJP में घमासान, पूर्व प्रवक्ता को भेजा गया 1 करोड़ का मानहानि नोटिस

    चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य इकाई में अंदरूनी कलह और सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। पार्टी ने अपने ही पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एएनएस प्रसाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस थमा दिया है। बीजेपी का आरोप है कि प्रसाद ने पार्टी के राज्य नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर, मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाकर संगठन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। यह कानूनी नोटिस बीजेपी लीगल सेल के अध्यक्ष ए. कुमारगुरु की ओर से जारी किया गया है।

    अखबारों और सार्वजनिक मंचों पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि एएनएस प्रसाद ने बीते 9 मई को एक नामी दैनिक समाचार पत्र सहित कई सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी के शीर्ष प्रादेशिक नेताओं के खिलाफ अशोभनीय और गंभीर टिप्पणियां की थीं। बीजेपी का मानना है कि ये तमाम बयान विशुद्ध रूप से राजनैतिक द्वेष और निजी एजेंडे के तहत दिए गए थे। नोटिस में कहा गया कि राज्य के संवेदनशील राजनैतिक माहौल के बीच इस तरह की बयानबाजी का एकमात्र मकसद आम जनता और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम तथा अविश्वास की स्थिति पैदा करना था।

    बिना शर्त माफी और 1 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग

    बीजेपी ने अपने पूर्व प्रवक्ता को चेतावनी देते हुए मांग की है कि वे पार्टी नेतृत्व पर इस तरह के झूठे कीचड़ उछालना तुरंत बंद करें। नोटिस के माध्यम से प्रसाद को निर्देश दिया गया है कि वे आगामी 7 दिनों के भीतर उन्हीं मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अखबारों में पार्टी से बिना शर्त लिखित माफी मांगें, जहां उन्होंने ये बयान दिए थे। इसके साथ ही, संगठन की प्रतिष्ठा और साख को पहुंचाए गए भारी नुकसान के एवज में उनसे 1 करोड़ रुपये बतौर हर्जाना देने को भी कहा गया है।

    टिकटों की खरीद-फरोख्त और पार्टी फंड में हेराफेरी का दावा

    दरअसल, यह पूरा विवाद एएनएस प्रसाद के उन सनसनीखेज दावों के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं होने की बात कही थी। प्रसाद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट बांटने के बदले मोटी रकम वसूली गई है। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि चुनाव के लिए आए केंद्रीय पार्टी फंड का इस्तेमाल शराब, ऐशो-आराम के खाने और कुछ नेताओं के निजी फायदों के लिए किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों के लिए आवंटित धनराशि के दुरुपयोग और पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के विरोधी दलों के साथ गुप्त राजनैतिक संबंध होने जैसे कई संगीन आरोप जड़ दिए थे।

    बीजेपी ने आरोपों को नकारा, पहले ही छीन चुकी है पद

    बीजेपी आलाकमान ने पूर्व प्रवक्ता के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह काल्पनिक और मनगढ़ंत करार दिया है। पार्टी का कहना है कि प्रसाद अपने द्वारा लगाए गए किसी भी आरोप के समर्थन में कोई पुख्ता दस्तावेज या कानूनी रूप से मान्य सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। गौरतलब है कि एएनएस प्रसाद को पार्टी विरोधी बयानों के चलते पहले ही प्रवक्ता पद से कार्यमुक्त किया जा चुका है। उन्होंने बीजेपी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाते हुए अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) से एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल होने की सार्वजनिक अपील की थी, जिसे अनुशासनहीनता मानते हुए पार्टी उन पर यह कार्रवाई पहले ही कर चुकी थी।

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