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    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस में जश्न, मुंबई में कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई

    मुंबई: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से त्यागपत्र दिए जाने के तुरंत बाद विपक्षी खेमे, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी में भारी उत्साह का माहौल देखा गया। खबर सार्वजनिक होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत स्वयं मिठाई लेकर पहुंचे और कार्यकर्ताओं का मुंह मीठा कराया। पार्टी नेताओं ने इस घटनाक्रम को देश के करोड़ों विद्यार्थियों के संघर्ष, निष्ठा और दृढ़ संकल्प की ऐतिहासिक जीत करार दिया है।

    छात्रों के कड़े संघर्ष और युवा शक्ति के संकल्प की विजय

    मिठाई बांटने के उपरांत कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि देश का युवा लोकतंत्र की रक्षा करने में पूरी तरह से समर्थ है। उन्होंने कहा कि यह जीत कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मार्गदर्शन में एनएसयूआई (NSUI) और देश के छात्रों द्वारा किए गए निरंतर संघर्ष का परिणाम है। सावंत ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि युवाओं ने अपने अटूट सत्याग्रह से यह सिद्ध कर दिया है कि देश किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से चलता है।

    बेरोजगारी, पेपर लीक और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का मुद्दा

    अपनी बात आगे रखते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने देश में बढ़ती बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का मुद्दा पुरजोर ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि विगत 12 वर्षों में 150 से अधिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, किंतु किसी ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली। सावंत ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे निर्दोष छात्रों पर निर्ममता से बल प्रयोग किया गया। उन्होंने मांग की कि केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से बात नहीं बनेगी, बल्कि केंद्र सरकार को देश के युवाओं से माफी भी मांगनी चाहिए।

    अहंकार की पराजय और सत्य की पुनर्स्थापना

    इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने इसे सत्ता के अहंकार की पराजय और सत्य तथा संविधान की जीत बताया। उन्होंने कहा कि नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और जंतर-मंतर पर निरंतर जारी छात्र आंदोलन ने सरकार पर भारी नैतिक दबाव बनाया। इसी अभूतपूर्व जनदबाव के कारण केंद्र सरकार को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।

    नीट विवाद के बाद तेज हुई देशव्यापी राजनीतिक बयानबाजी

    उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा परिणाम और पेपर लीक प्रकरण के सामने आने के बाद से ही पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी था। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष लामबंद था और लगातार शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की मांग कर रहा था। धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद अब देश भर में राजनीतिक हलचल और बयानबाजी अत्यधिक तेज हो गई है, वहीं विपक्ष इसे अपनी नैतिक और राजनीतिक विजय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

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