जयपुर। एनएसयूआई नेत्री ऋतु बराला के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में कांग्रेस का धरना बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच, प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के पैर में गंभीर चोट लगने से राजनीतिक पारा और अधिक गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कमिश्नरेट परिसर में लगाई गई पाबंदियों और बुनियादी सुविधाओं की कथित रोक-टोक को लेकर भी तीव्र नाराजगी व्यक्त की है।
डोटासरा के चोटिल होने पर जूली के तीखे सवाल
बुधवार सुबह पुलिस प्रशासन द्वारा कमिश्नरेट परिसर में की गई अतिरिक्त नाकेबंदी, सख्त बैरिकेडिंग और पीने के पानी व वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं पर रोक-टोक के बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अचानक सीढ़ियों से फिसलकर नीचे गिर गए, जिससे उनके पैर में चोट लग गई। इस घटना के तुरंत बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर डॉक्टरों की टीम को बुलानी पड़ी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ा रोष जताते हुए आरोप लगाया कि कमिश्नरेट परिसर के भीतर पुलिस की अनावश्यक सख्ती और जानबूझकर बरती जा रही प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही यह हालात पैदा हुए। उन्होंने वॉशरूम पर ताला लगाए जाने का कड़ा मुद्दा उठाते हुए पुलिस के अमानवीय रवैया पर गंभीर सवाल खड़े किए और पूछा कि इस घटना की पूरी जिम्मेदारी कौन लेगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग पर डटे हुए हैं, बावजूद इसके उन्हें हर कदम पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस द्वारा मुख्य द्वार बंद किए जाने के कारण पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया जैसी वरिष्ठ शख्सियतों को भी मुख्य द्वार पर रोके जाने के मामले सामने आए।
कानूनी लड़ाई लड़ने और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे पिछले कई घंटों से कमिश्नरेट को घेरे हुए हैं क्योंकि देश की बेटियों के साथ हुई मारपीट और अभद्रता के बावजूद पुलिस मामले में एफआईआर दर्ज करने से बच रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(3) के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और यदि प्रशासन ने न्याय नहीं किया, तो वे इस लड़ाई को लड़ने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
एफआईआर की मांग और बढ़ता गतिरोध
गौरतलब है कि कांग्रेस का यह पूरा आंदोलन दिल्ली में एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव ऋतु बराला के साथ कथित पुलिसिया बदसलूकी और मारपीट के खिलाफ जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर केंद्रित है। सोमवार शाम से ही पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली और कई अन्य वरिष्ठ विधायक व नेता कमिश्नरेट परिसर में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन का अपना अलग कानूनी तर्क है कि घटना चूंकि दिल्ली की है और वहां के कनॉट प्लेस थाने में इस संबंध में पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है, इसलिए उसी प्रकरण के तहत आगे की तफ्तीश की जा रही है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी पुलिस की इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं है और अपनी जिद पर अड़ी हुई है। मंगलवार देर रात यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने और अब गोविंद सिंह डोटासरा के चोटिल होने की इन ताजा घटनाओं ने पुलिस और कांग्रेस के बीच चल रहे इस राजनीतिक संघर्ष को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।

