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    MLA रविंद्र सिंह भाटी पर कांग्रेस का समर्थन, BJP सरकार पर तीखा हमला

    बाड़मेर। राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिकों के हक की लड़ाई अब केवल एक स्थानीय मजदूर आंदोलन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने मरुधरा के सियासी गलियारों में बड़ा भूचाल ला दिया है। शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा बाड़मेर कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़कने की बेहद भावुक और चौंकाने वाली घटना के बाद, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह आक्रामक हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा तक, कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता निर्दलीय विधायक और पीड़ित मजदूरों के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) बैकफुट पर नजर आ रही है।

    "विधायक को ऐसा कदम उठाना पड़े तो आम आदमी का क्या होगा?": पूर्व सीएम अशोक गहलोत

    इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिक पिछले 38 दिनों से धरने पर बैठे हैं और विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी पखवाड़े भर से उनके साथ थे। इसके बावजूद सरकार और जिला प्रशासन का मौन रहना उनकी घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है। इसी उदासीनता के कारण एक जनप्रतिनिधि को कलेक्ट्रेट कूच करने और अपने ऊपर पेट्रोल डालने जैसे आत्मघाती कदम के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सरकार से अविलंब इस मामले का सकारात्मक हल निकालने की मांग की है।

    पीसीसी चीफ डोटासरा का तंज- "प्रदेश में लोकतंत्र वेंटिलेटर पर", भाटी को भी दी नसीहत

    राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को अपनी बात सुनाने के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़कना पड़े, यह प्रदेश के लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है। उन्होंने सरकार से कुंभकर्णी नींद से जागकर 45 दिनों से परेशान मजदूरों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने को कहा। हालांकि, डोटासरा ने एक जिम्मेदार राजनेता के तौर पर विधायक रविंद्र भाटी के इस तरीके की आलोचना भी की। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से आत्मदाह का प्रयास करना कानून और सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह गलत है; विरोध हमेशा संवैधानिक दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

    विपक्ष के अन्य दिग्गजों ने दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना को लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक बताते हुए मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि निर्वाचित विधायक और गरीब मजदूरों का इतना अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि विधायक भाटी या किसी भी मजदूर के साथ कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे। वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने भी इसे प्रशासनिक असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताया है।

    प्रशासन के साथ 4 घंटे की वार्ता विफल, इन 5 प्रमुख मांगों पर अड़ा है प्रतिनिधिमंडल

    कलेक्ट्रेट परिसर में मचे भारी बवाल के बाद देर रात जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब 4 घंटे तक लंबी माथापच्ची हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। आंदोलनकारी मुख्य रूप से इन पांच मांगों पर अड़े हुए हैं:

    • श्रमिकों की बहाली: नए टेंडर के बाद कंपनी द्वारा हटाए गए 100 से अधिक स्थानीय ड्राइवरों और मजदूरों की बिना शर्त तुरंत काम पर वापसी हो।

    • ड्यूटी का समय: खदान के भीतर काम करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए सख्त रूप से 8 घंटे की शिफ्ट व्यवस्था लागू की जाए।

    • स्थानीय को प्राथमिकता: इस पूरी खनन परियोजना में बाड़मेर के स्थानीय युवाओं को रोजगार में पहली प्राथमिकता मिले।

    • श्रम नियमों का पालन: श्रम विभाग के नियमों के अनुसार सभी कामगारों को समय पर वेतन, बोनस और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

    • उच्च स्तरीय सुरक्षा: खदान के अंदर काम करने के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए शत-प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय मानकों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित हो।

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