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    Homeराजनीतिलेबनान को लेकर विवादित बयान से भड़की सियासत, कांग्रेस ने जताई नाराजगी

    लेबनान को लेकर विवादित बयान से भड़की सियासत, कांग्रेस ने जताई नाराजगी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को इजरायली मंत्री द्वारा 'पूरे लेबनान को राख में तब्दील करने' की दी गई बेहद भड़काऊ धमकी पर भारत सरकार की रहस्यमयी चुप्पी पर कड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए शांति समझौते का दुनिया भर में सतर्कता के साथ स्वागत किया जा रहा है, वहीं इजरायल के शीर्ष हुक्मरानों के ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान वैश्विक अमन-चैन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। कांग्रेस महासचिव ने आशंका जताई कि इस बेहद संवेदनशील मसले पर भारत का मौन रहना देश के दीर्घकालिक कूटनीतिक और रणनीतिक हितों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

    पीएम मोदी की इजरायल नीति और कॉर्पोरेट हितों के संरक्षण का संगीन आरोप

    जयराम रमेश ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इतने बड़े घटनाक्रम पर भी हमेशा की तरह प्रधानमंत्री पूरी तरह खामोश बैठे हैं। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की इजरायल के प्रति यह अंधभक्ति देश के व्यापक राष्ट्रीय हितों की वेदी पर केवल अपने करीबी 'मोदानी' व्यापारिक साम्राज्य के व्यावसायिक हितों को सुरक्षित और पोषित करने के लिए की जा रही है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तल्खी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और युद्ध के बादल गहरा रहे हैं।

    इतामार बेन-गवीर का भड़काऊ युद्धघोष और लेबनान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी

    इस विवाद की जड़ में इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर का वह अत्यधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने लेबनान के खिलाफ पूर्ण युद्ध छेड़ने की वकालत की है। बेन-गवीर ने खुलकर लिखा था कि एक इजरायली मां के बहने वाले हर आंसू के बदले लेबनान की एक हजार माताओं को रुलाया जाना चाहिए और पूरे लेबनान को आग के हवाले कर देना चाहिए। अमेरिकी मध्यस्थता के प्रयासों को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने साफ किया था कि इजरायल को पूरी दुनिया पर यह जाहिर कर देना चाहिए कि उनके नागरिकों और आईडीएफ सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और अब इस सीमाई 'पिंग-पोंग' के खेल को बंद कर, नपे-तुले जवाबों के बजाय आतंक को समूल नष्ट करने के लिए पूर्ण आक्रामक रुख अपनाना होगा।

    मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की सशक्त विदेश नीति का हवाला देकर घेरा

    इसी सिलसिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्रियों डॉ. मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी की कूटनीतिक दृढ़ता का उदाहरण देते हुए मौजूदा हुकूमत को जमकर आड़े हाथों लिया। खेड़ा ने देवयानी खोबरागड़े के ऐतिहासिक राजनयिक विवाद का स्मरण कराते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने बेहद शालीन रहते हुए भी अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में महज 24 घंटे के भीतर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर से सुरक्षा घेरा हटाकर महाशक्ति को भारत की संप्रभुता का स्पष्ट अहसास करा दिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर की सशक्त विदेश नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि यदि यह सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल की निंदा करने का साहस नहीं जुटा पा रही थी, तो कम से कम लाल सागर में इजरायली हमलों के कारण मारे गए निर्दोष भारतीय नाविकों की शहादत पर जवाब मांगते हुए औपचारिक माफी की मांग तो कर ही सकती थी।

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