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    Homeराजस्थानअलवरNEET एग्जाम में ड्रेस को लेकर विवाद, बुर्का मुद्दे पर गरमाई राजनीति

    NEET एग्जाम में ड्रेस को लेकर विवाद, बुर्का मुद्दे पर गरमाई राजनीति

    अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले में नीट परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर बुर्का पहनकर आई मुस्लिम महिला अभ्यर्थी को लगभग एक घंटे तक प्रवेश से रोके जाने का एक विवादित मामला प्रकाश में आया है। इस संवेदनशील वाकये के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। घटना की जानकारी सामने आते ही कांग्रेस, भाजपा और मुस्लिम धर्मगुरुओं की तरफ से अलग-अलग और कड़े रुख देखने को मिल रहे हैं।

    कांग्रेस ने उत्पीड़न का लगाया आरोप

    इस घटनाक्रम को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रूबी खान ने इस पूरे मामले को सीधे तौर पर छात्रा का उत्पीड़न करार दिया है। उनका कहना है कि बुर्के में प्रवेश देने के नाम पर किसी परीक्षार्थी को एक घंटे तक रोके रखना पूरी तरह से गलत और अमानवीय है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि परीक्षा देने आई छात्रा को बेवजह परेशान किया गया, जिससे परीक्षा से ठीक पहले वह गंभीर मानसिक तनाव से गुजरने को मजबूर हुई।

    बीजेपी ने की नियमों की वकालत

    दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को किसी भी तरह का धार्मिक या राजनीतिक रंग न देने की नसीहत दी है। भाजपा के प्रांत मीडिया सह प्रभारी रचित कच्छावा ने इस संदर्भ में कहा कि परीक्षा के तय नियमों का पालन करना हर एक अभ्यर्थी के लिए अनिवार्य है। इसे किसी भी तरह से मजहबी या सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए अगर प्रशासन को और अधिक कड़े कदम उठाने की आवश्यकता हो, तो वह भी उठाए जाने चाहिए क्योंकि परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता सबसे ऊपर है।

    मुस्लिम धर्मगुरुओं ने व्यक्त की नाराजगी

    इस पूरे विवाद पर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और धर्मगुरुओं ने अपनी गहरी असंतुष्टि और नाराजगी प्रकट की है। जयपुर स्थित इस्लामिक सेंटर के संयोजक मोहम्मद नाजिम ने इस वाकये की कड़े शब्दों में निंदा की है। मोहम्मद नाजिम का आरोप है कि इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि किस तरह से एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा और परीक्षा जैसे क्षेत्रों में इस तरह का भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

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