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    इंदौर में साइबर अपराधियों के हाथ लगा महिला बाल विकास का डाटा, गर्भवती महिलाएं टारगेट

    इंदौर। इंदौर में सायबर अपराध के केस लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। इस बार सायबर अपराधियों के निशाने पर गर्भवती और धात्री माताएं हैं। सरकार अलग अलग योजनाओं में इन माताओं को लाभ देती है और महिला एवं बाल विकास के द्वारा इन्हें यह लाभ पहुंचाए जाते हैं। जरूरतमंद महिलाओं का यह डाटा भारत सरकार के पोषण ट्रैकर ऐप पर रहता है। सायबर अपराधी पोषण ट्रैकर ऐप से यह डाटा लेकर जरूरतमंद महिलाओं को फोन कर रहे हैं और ओटीपी मांगकर उन्हें सायबर फ्रॉड का शिकार बना रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लगातार इस मामले में शिकायत कर रही हैं लेकिन यह मामले रुकने के बजाय बढ़ते ही जा रहे हैं। 

    इस तरह से हो रहे फ्रॉड 

    सायबर फ्रॉड का शिकार बनी सोनू ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का नाम बताकर मुझसे ओटीपी मांगा गया और मेरे खाते से 12 हजार रुपए निकल गए। फोन करने वाले को मेरे बारे में, सरकारी योजना के बारे में और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के बारे मे पूरी जानकारी थी। मुझे लगा कि आंगनबाड़ी से ही फोन किया गया है इसलिए मैं समझ नहीं पाई। 

    सायबर अपराधियों के पास महिला बाल विकास का पूरा डाटा

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी गोयल ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्र बड़ी ग्वालटोली के पोषण ट्रैकर में दर्ज सभी गर्भवती और धात्री माताओं को मोबाइल नंबर 7864077543 से फोन आए। फोन करने वाले ने खुद को महिला एवं बाल विकास का अधिकारी बताया और कहा कि आपके खाते में सरकारी योजनाओं की राशि आने वाली है। आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा वह बता दें। जैसे ही महिलाओं ने ओटीपी बताया उनके खाते से पूरी राशि निकल गई। इसी तरह कनाड़िया के अम्बामाता आंगनबाड़ी केंद्र के हितग्राहियों के पास भी फोन आए। एक समझार हितग्राही ने कॉल रिकार्डिंग कर ली और उस आंगनबाड़ी की कार्यकता को साझा किया। इसी तरह कुछ दिन पूर्व पिपल्याहाना की आंगनबाड़ी रमाबाईनगर में भी एक हितग्राही के खाते से 14,000 रुपए की राशि निकाल ली गई। राजकुमारी गोयल ने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप से महिलाओं का डाटा कैसे लीक हो रहा है यह समझ से बाहर है। हम सायबर सेल और स्थानीय पुलिस स्टेशनों में कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन फिर भी यह मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। 

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका से झगड़ रहे लोग

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी गोयल ने बताया कि सायबर अपराधी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के नाम से जरूरतमंद महिलाओं को फोन लगाते हैं और ओटीपी मांगते हैं। सायबर फ्रॉड होने पर महिलाओं को लगता है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने ही उनसे ओटीपी मांगा था। खाता खाली होने पर वह आंगनबाड़ी आकर हमसे झगड़ते हैं। फिर जब हमें जरूरत पड़ती है तो वह ओटीपी भी नहीं देते। इस तरह हमें भी काम करने में बहुत परेशानी हो रही है।

    हर आंगनबाड़ी पर जागरूकता सेशन आयोजित करेंगे

    महिला बाल विकास अधिकारी रजनीश सिन्हा ने बताया कि सायबर फ्रॉड करने वाले जरूरतमंद महिलाओं का डाटा चुरा लेते हैं और फिर वे इन्हें शिकार बनाते हैं। हम इस पर जागरूकता के लिए कैंपेन चलाएंगे। हर आंगनबाड़ी पर एक सेशन आयोजित करेंगे। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह सेशन आयोजित किए जाएंगे। परियोजना अधिकारी राजेन्द्र कुमार मंडलोई ने बताया कि हमें इस तरह से महिलाओं को शिकार बनाने की जानकारी मिली है, हम हर स्तर पर महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं। यदि कोई सायबर फ्रॉड का शिकार बन जाता है तो तुरंत पुलिस में शिकायत करे। 

    क्या है पोषण ट्रैकर एप

    पोषण ट्रैकर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ई गवर्नेंस डिवीजन द्वारा 1 मार्च 2021 को लांच किया गया एक मोबाइल एप्पीकेशन है। इसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए डिजाइन किया गया है। इसके माध्यम से जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया जाता है और उनका रिकार्ड रखा जाता है। इसमें गर्भवती महिलाओं और महिला बाल विकास के अधिकारियों कर्मचारियों का डाटा रहता है। 

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