अहमदाबाद । गुजरात में आम आदमी पार्टी (आप) के आक्रामक नेता चैतर वसावा के बढ़ते प्रभाव के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए नर्मदा जिला पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस बीच, अब जिले के भीतर एक बेहद चौंकाने वाला राजनैतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री के सुशासन के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अंबेडकर हॉल में आयोजित 'प्रबुद्ध नागरिक सम्मान' समारोह के दौरान नर्मदा जिला भाजपा की आंतरिक कलह खुलकर सबके सामने आ गई। कार्यक्रम में स्थानीय महिला विधायक डॉ. दर्शना देशमुख का उचित सत्कार न होने और तय प्रोटोकॉल की अनदेखी किए जाने से नाराज होकर वह बीच में ही सभा छोड़कर चली गईं। इसके बाद विधायक डॉ. दर्शना देशमुख वाडिया के गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं, जहां उनके समर्थन में भरूच के वरिष्ठ सांसद मनसुख वसावा भी आकर बैठ गए, जिससे नर्मदा जिले की राजनीति में भारी उबाल आ गया है।
राजनैतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज है कि डॉ. दर्शना देशमुख के इस आक्रोश की मुख्य वजह नर्मदा जिला भाजपा अध्यक्ष नील राव हैं, जिनके द्वारा कथित तौर पर लगातार विधायक की उपेक्षा की जा रही थी। जब यह तिरस्कार सहनशीलता की सीमा पार कर गया, तो दर्शना देशमुख ने खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय है कि दर्शना देशमुख भरूच के प्रथम भाजपा सांसद चंदूभाई देशमुख की सुपुत्री हैं, जिन्होंने पूर्व में कांग्रेस के एक कद्दावर नेता को पराजित कर राजनैतिक हलकों में सनसनी फैला दी थी। चंदूभाई देशमुख को भरूच संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतारने का ताना-बाना तब नरेंद्र मोदी ने ही बुना था और उस ऐतिहासिक जीत के बाद से लेकर आज तक कांग्रेस इस सीट पर दोबारा वापसी नहीं कर पाई है।
मैं चुनाव जीतकर आई हूं, पैराग्लाइडिंग करके नहीं
समारोह के दौरान जब महिला विधायक को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और लगातार दरकिनार किया गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते हुए उन्होंने तीखे लहजे में अपना रोष प्रकट करते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें यहां केवल अपमानित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह जनता का जनादेश पाकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतकर यहां पहुंची हैं, न कि ऊपर से सीधे पैराग्लाइडिंग करके टपकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के इन पदाधिकारियों को आदिवासी समाज के मान-सम्मान की कोई परवाह नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा संगठन और विधायक पद दोनों से त्यागपत्र देने की कड़ी चेतावनी दे डाली। उन्होंने जिला अध्यक्ष नील राव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह पिछले दो वर्षों से उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं और गांधीनगर के एक रसूखदार मंत्री का वरदहस्त प्राप्त होने के कारण अपनी मनमानी चला रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संगठन की इन्हीं तानाशाही नीतियों की वजह से पार्टी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांसदों और विपक्षी विधायक का मिला साथ
इस पूरे सियासी ड्रामे के बाद जहां एक तरफ भाजपा सांसद मनसुख वसावा और आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा से विधायक चैतर वसावा ने डॉ. दर्शना देशमुख के रुख का खुला समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ डैमेज कंट्रोल के लिए जिले के प्रभारी मंत्री ईश्वर सिंह पटेल और पूर्व मंत्री गणपत सिंह वसावा तुरंत राजपीपला सर्किट हाउस पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए दर्शना देशमुख को बातचीत का न्योता भेजा, परंतु आहत विधायक ने उनसे मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया।
सीट के टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान
वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में डॉ. दर्शना देशमुख ने नादोद विधानसभा सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। वह उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ पेशे से एक डॉक्टर (एमडी गायनेकोलॉजिस्ट) हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नर्मदा जिले के वर्तमान अध्यक्ष नील राव की नजर असल में इसी नादोद विधानसभा क्षेत्र पर टिकी हुई है और वह आगामी चुनाव में अपनी धर्मपत्नी के लिए यहां से टिकट की दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि इसी टिकट की होड़ और वर्चस्व की लड़ाई के कारण ही विधायक दर्शना देशमुख और जिला अध्यक्ष नील राव के बीच के समीकरण पूरी तरह बिगड़ चुके हैं, जो अब सड़क पर खुलकर सामने आ गए हैं।


