दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनावी बिगुल आधिकारिक तौर पर फूंक दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा सोमवार को निर्वाचन आयोग की अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित किए जाने के साथ ही इलाके में नामांकन की प्रक्रिया का औपचारिक आगाज हो गया है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी आगामी 13 जुलाई तक अपने पर्चे दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, नामांकन की घड़ी आने के बाद भी सूबे के दोनों मुख्य सियासी दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के पत्तों का खुलासा नहीं किया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है।
चुनावी कार्यक्रम की महत्वपूर्ण तिथियां और समय सीमा
निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक, दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 14 जुलाई को की जाएगी। इसके बाद, जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 16 जुलाई तक अपना पर्चा वापस ले सकेंगे। क्षेत्र के मतदाता 30 जुलाई को मतदान केंद्रों पर जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जबकि इस चुनावी रण का अंतिम परिणाम 3 अगस्त को मतों की गिनती के बाद घोषित किया जाएगा। आयोग ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को 4 अगस्त 2026 तक मुकम्मल करने का लक्ष्य रखा है।
राजेंद्र भारती की विदाई के बाद खाली हुई थी सीट
दतिया की यह विधानसभा सीट कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदन से सदस्यता रद्द होने के कारण खाली हुई थी। दरअसल, एक आपराधिक मुकदमे में अदालत ने उन्हें तीन साल से अधिक की कारावास की सजा सुनाई थी। देश के जनप्रतिनिधित्व कानून के नियमों के तहत यदि किसी भी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाती है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने कार्रवाई करते हुए उनकी विधायकी समाप्त करने का आदेश जारी किया था।
उम्मीदवारों के नामों पर सस्पेंस और प्रमुख दावेदार
नामांकन के पर्चे मिलने की शुरुआत होने के बावजूद भी भाजपा और कांग्रेस की तरफ से टिकटों को लेकर सस्पेंस बरकरार है। दोनों ही खेमों में जिताऊ चेहरे को उतारने के लिए मैराथन मंथन का दौर चल रहा है, जिसके चलते राजनीतिक विश्लेषकों और जनता की निगाहें उम्मीदवारों की सूची पर टिकी हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर दोबारा दांव लगा सकती है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी राजेंद्र भारती की अनुपस्थिति में किसी नए और मजबूत विकल्प को मैदान में उतारने की रणनीति बनाने में जुटी हुई है।


