रायपुर| छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण अंचलों के चहुंमुखी विकास के लिए 2 अक्टूबर से विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति प्रदान कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ग्रामीण स्वयं अपने गाँव की वास्तविक जरूरतों, समस्याओं और विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं को तय करने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं के दौरान ग्रामीणों से मिलने वाले बहुमूल्य सुझावों, स्थानीय उपलब्ध संसाधनों और बुनियादी आवश्यकताओं के आधार पर ही संबंधित ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विकसित ग्राम पंचायत योजना और अधिनियम का दायरा
इस योजना को 'वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' के प्रावधानों के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने का मुख्य माध्यम बनाया गया है। इसके तहत गाँवों में पहले से मौजूद संसाधनों, भौतिक परिसंपत्तियों और विकास संबंधी कमियों का सूक्ष्म आकलन किया जाएगा तथा जनसहभागिता के माध्यम से आवश्यक कार्यों की पहचान की जाएगी। ग्राम सभा से औपचारिक अनुमोदन मिलने के उपरांत इन योजनाओं को आगामी चरण में विकासखंड और जिला स्तर पर समेकित (इंटीग्रेट) किया जाएगा।
2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से औपचारिक शुरुआत
प्रदेशभर की समस्त ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं के जरिए 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करने की प्रक्रिया का आधिकारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर बैठकों में उपस्थित ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से जुड़े आधारभूत आंकड़ों, भौगोलिक मानचित्रों, अनुमेय कार्यों और संपूर्ण योजना निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही, ग्राम सभाओं के मंच से गाँवों की विकास संबंधी कमियों, जल बजट और 'ई-जल पोर्टल' से प्राप्त होने वाले अनुशंसित कार्यों की जानकारी भी साझा की जाएगी। इस दौरान ऐसी भौतिक परिसंपत्तियों की भी पहचान की जाएगी जो धरातल पर तो उपलब्ध हैं, परंतु अभी तक डिजिटल अभिलेखों या पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाई हैं। बैठकों में बस्ती, वार्ड और ग्राम स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन तथा सामुदायिक परामर्श की पूरी प्रक्रिया और समय-सीमा भी तय की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण इस प्रक्रिया से जुड़ सकें।
अक्टूबर-नवंबर माह में घर-घर और वार्ड स्तर पर सुझाव संग्रह
योजना के सुचारू क्रियान्वयन हेतु सितंबर माह में आवश्यक प्रारंभिक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। इसके अंतर्गत संबंधित अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने के साथ ही 'युक्तधारा पोर्टल' पर उपलब्ध विभिन्न मानचित्र परतों के आधार पर ग्राम पंचायतों का प्राथमिक डेटा तैयार किया जा चुका है।
अब अक्टूबर और नवंबर के महीनों में बस्ती व वार्ड स्तर पर विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनके माध्यम से ग्रामीणों के साथ सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों के जरिए ग्रामीणों से उनके गाँवों की मुख्य समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, स्थानीय संसाधनों और भावी विकास कार्यों को लेकर सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में गाँवों में मौजूद परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा और डिजिटल रिकॉर्ड से छूटी परिसंपत्तियों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
दिसंबर में ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत होगी कार्ययोजना
दिसंबर माह के दौरान भूमि एवं क्षेत्र की आवश्यकताओं के आधार पर तैयार की गई 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' का एक विस्तृत प्रारूप संबंधित ग्राम सभा के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, उनके संभावित स्थानों और अन्य विवरणों से ग्रामीणों को अवगत कराया जाएगा। व्यक्तिगत लाभार्थियों से जुड़े प्रस्तावित कार्यों पर भी इसी दौरान चर्चा की जाएगी।
ग्रामीणों के सुझावों और आपसी विचार-विमर्श के बाद योजना में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे और अंततः ग्राम सभा द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित कर इसे अनुमोदित किया जाएगा। ग्राम सभा से स्वीकृत इस योजना को डिजिटल समेकन के अगले चरण के लिए विकासखंड स्तर पर प्रेषित किया जाएगा।
15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर समेकन प्रक्रिया
ग्राम पंचायतों से अनुमोदित योजनाएँ प्राप्त होने के पश्चात् आगामी 15 जनवरी तक विकासखंड तथा जिला स्तर पर समेकन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। ब्लॉक स्तर पर विभिन्न पंचायतों की योजनाओं को एकीकृत करते हुए संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों और अन्य योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से जुड़ी जानकारियाँ जोड़ी जाएँगी। इसके पश्चात विकासखंड स्तर पर तैयार समेकित योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर की प्राथमिकताओं को उच्च प्रशासनिक स्तर की कार्ययोजनाओं से जोड़ा जा सके।
जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष जोर
इस योजना के अंतर्गत गाँवों की प्राथमिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़े संसाधनों और प्रतिकूल मौसमी आपदाओं या घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। योजना निर्माण के प्रत्येक चरण में प्राकृतिक एवं भौतिक संपदा का आकलन किया जाएगा ताकि एक मजबूत और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव रखी जा सके।


