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    Homeखेलध्रुव जुरेल बोले- मेरी जिम्मेदारी विकेटकीपिंग से कहीं ज्यादा थी

    ध्रुव जुरेल बोले- मेरी जिम्मेदारी विकेटकीपिंग से कहीं ज्यादा थी

    मुंबई। राजस्थान रॉयल्स के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के इस सीजन को लेकर बड़ा बयान दिया है। जुरेल ने कहा कि इस सत्र में उनकी टीम को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद पूरी टीम का ध्यान हमेशा सकारात्मक खेल पर ही केंद्रित रहा। हालांकि, राजस्थान रॉयल्स की टीम क्वालीफायर मुकाबले में आगे बढ़ने में असफल रही, लेकिन खिलाड़ियों ने अपनी तरफ से जीत का पूरा प्रयास किया। जुरेल के मुताबिक, आईपीएल जैसे बेहद प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में हर मैच में काफी दबाव और उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, ऐसे में टीम ने कठिन क्षणों में भी एकजुट रहकर अपना मनोबल बनाए रखा।

    युवा गेंदबाजों का बढ़ाया हौसला

    ध्रुव जुरेल ने इस टूर्नामेंट में अपनी एक नई और बड़ी भूमिका का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीम में उनकी जिम्मेदारी केवल विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी के दौरान रन बनाने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि पहली बार आईपीएल खेल रहे युवा गेंदबाजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी उनका मुख्य काम था। जुरेल ने कहा कि बड़े मंच पर अक्सर नए खिलाड़ियों में घबराहट और आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। एक विकेटकीपर के तौर पर वे गेंदबाजों को कभी यह नहीं सिखाते कि कैसी गेंदबाजी करनी है, बल्कि वे बस इतना कहते हैं कि अपना समय लो और खुद पर भरोसा रखो। जुरेल की इस बातचीत से युवा गेंदबाजों को दबाव से मुक्ति मिली और वे मैदान पर अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके।

    ड्रेसिंग रूम का माहौल और अहम साझेदारियां

    टीम की कामयाबी के पीछे ड्रेसिंग रूम के माहौल को अहम बताते हुए जुरेल ने कहा कि वहां होने वाली सकारात्मक बातचीत का मैदान पर बहुत अच्छा असर पड़ता है। जब कोई खिलाड़ी बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर उतरता है, तो साथियों द्वारा कही गई बातें उसके दिमाग में रहती हैं, जिससे मुश्किल हालातों में भी शांत रहकर सही फैसला लेने में मदद मिलती है। इसके अलावा, मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका पर बात करते हुए जुरेल ने बताया कि उनका मुख्य ध्यान लगातार स्ट्राइक बदलते रहने पर रहता है। वे यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे आक्रामक बल्लेबाजों का पूरा साथ निभाते हैं, ताकि टीम के लिए बड़ी और मजबूत साझेदारियां खड़ी की जा सकें।

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