मुंबई। महाराष्ट्र में इस वर्ष मानसून के दौरान संतोषजनक बारिश न होने के कारण सूखे की विकराल स्थिति पैदा हो गई है, जिससे किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पानी की कमी के चलते खरीफ की फसलें बड़े पैमाने पर बर्बाद हो चुकी हैं, और अब आगामी रबी सीजन पर भी गहरा संकट मंडराने लगा है। इस गंभीर हालात से निपटने के लिए केंद्र सरकार का एक उच्चस्तरीय सूखा आकलन दल राज्य के दौरे पर पहुंचा है।
मुख्यमंत्री के साथ अहम बैठक और फसल नुकसान
केंद्रीय दल के महाराष्ट्र पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के मंत्री गिरीश महाजन, दत्तात्रय भरणे और मकरंद पाटील भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने केंद्र से आए दल को राज्य के हालातों से अवगत कराते हुए बताया कि कपास, सोयाबीन और तूर जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण अंचलों में पीने के पानी की किल्लत भी खड़ी हो गई है।
केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग
मुख्यमंत्री फडणवीस ने केंद्रीय दल के समक्ष किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति और पशुधन के सामने आ रहे जल संकट का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में किसानों, खेतिहर मजदूरों और प्रभावित परिवारों को हरसंभव आर्थिक संबल देना जरूरी है। राज्य सरकार की ओर से केंद्र को पहले ही एक प्रारंभिक ज्ञापन सौंपा जा चुका है, और अब विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पेयजल और जल प्रबंधन पर विशेष जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा विकट परिस्थितियों में लोगों की प्यास बुझाना और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए जल संसाधनों के समुचित उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय दल ने भी प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी दौरा कर स्थिति का बारीकी से जायजा लिया है, जिससे यह तय किया जा सके कि केंद्र की तरफ से राज्य को कितनी और कब तक राहत राशि पहुंचाई जाएगी।


