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    लिथुआनिया में इमरजेंसी: एक गुब्बारे के कारण थमा पूरा देश, शुरू होगी नई जंग?

    विनियस। लिथुआनिया ने रूस के कलिनिनग्राद और बेलारूस से सटी अपनी सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए पूरे देश में ‘नेशनवाइड इमरजेंसी सिचुएशन’ लागू कर दी है। यह कदम बेलारूस की ओर से लगातार भेजे जा रहे मौसम मापने वाले बैलून के कारण उठाया गया है, जिनका इस्तेमाल छिपकर सिगरेट की तस्करी के लिए किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ये बैलून न केवल अवैध गतिविधियों के लिए खतरा हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई यातायात के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
    प्रधानमंत्री इंगा रुगिनिएने ने बताया कि हालात दिनों-दिन खराब होते जा रहे हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इसी वर्ष लगभग 600 बैलून और करीब 200 ड्रोन बेलारूस की तरफ से लिथुआनिया की सीमा पार कर चुके हैं। कई बार ये बैलून विमानों के नियमित लैंडिंग मार्ग में आ गए, जिससे विल्नियस एयरपोर्ट को कई बार बंद करना पड़ा। अक्टूबर के बाद से एयरपोर्ट 60 घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा और 30,000 से ज्यादा यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं।
    यह इमरजेंसी स्तर ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ से नीचे है, लेकिन सरकार का मानना है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि कड़ा कदम उठाना जरूरी था। इससे पहले लिथुआनिया ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी इमरजेंसी घोषित की थी। इस बार सरकार का कहना है कि बैलून की बढ़ती गतिविधि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है, जिसका उद्देश्य देश में अस्थिरता बढ़ाना है।
    लिथुआनिया के आरोपों को बेलारूस ने सिरे से नकार दिया है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का कहना है कि लिथुआनिया इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है और बैलून से किसी भी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि क्या लिथुआनिया युद्ध चाहता है, क्योंकि बेलारूस का ऐसा कोई इरादा नहीं है। इसके जवाब में लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नाउसैदा ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि यह बेलारूस की डिसरप्शन रणनीति का हिस्सा है।
    तनाव इस कदर बढ़ गया कि लिथुआनिया को अक्टूबर में बेलारूस से लगी दो बॉर्डर चेकपोस्ट बंद करनी पड़ीं। इसके बाद बेलारूस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लिथुआनियाई ट्रकों के अपनी सड़कों पर चलने पर रोक लगा दी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया। यूरोपीय संघ ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इन घटनाओं को ‘हाइब्रिड अटैक’ करार दिया और कहा कि बेलारूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है। ब्रसेल्स में बेलारूस के प्रतिनिधि को तलब कर चेतावनी भी दी गई है। लिथुआनिया का कहना है कि अब यह मामला सिर्फ तस्करी का नहीं रहा, बल्कि एविएशन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बन गया है। कुछ अधिकारी इसे संभावित ‘आतंकवादी गतिविधि’ की श्रेणी में रखने की बात भी कर रहे हैं।
    विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैलून 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं और सीधे विमानों के मार्ग में प्रवेश कर सकते हैं। यदि कोई बैलून किसी यात्री विमान से टकरा जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए लिथुआनिया ने देशव्यापी इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू की है, ताकि हवाई सुरक्षा और राष्ट्रीय स्थिरता को किसी भी खतरे से बचाया जा सके।

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