उज्जैन / भोपाल: मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बीमा पॉलिसी के नाम पर चल रहे एक सनसनीखेज और विशाल फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने गंभीर रूप से बीमार गरीब मजदूरों और किसानों को अपना निशाना बनाकर उनके नाम पर फर्जी तरीके से बीमा पॉलिसियां लीं और लगभग 16 करोड़ रुपये का अवैध क्लेम हड़प लिया। इस पूरे गिरोह का नेटवर्क इतना गहरा था कि कई मामलों में तो व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसकी पॉलिसी करवाई गई और फिर कागजों में हेरफेर कर मोटी रकम निकाल ली गई। इस काले खेल के तार मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य गुजरात के एजेंटों से भी जुड़े हुए हैं, जो संगठित तरीके से सिस्टम को चूना लगा रहे थे।
साठगांठ से तैयार हुए मौत के फर्जी दस्तावेज
EOW की तफ्तीश में यह कड़वा सच सामने आया है कि बिना सरकारी तंत्र की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला मुमकिन नहीं था। इस खेल में बीमा एजेंटों के साथ ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिव भी शामिल थे, जिन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में मदद की। गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था—मृत्यु के बाद बैक डेट (पुरानी तारीख) में एंट्री की जाती थी और दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया जाता था जैसे मौत प्राकृतिक हो। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के माध्यम से जारी की गई इन पॉलिसियों के पैसे सीधे आरोपियों द्वारा संचालित खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। उज्जैन की जयकुंवार नाम की एक महिला का मामला सबसे चौंकाने वाला रहा, जिनकी मौत 2023 में हुई थी, लेकिन उनके नाम पर 2024 में पॉलिसी लेकर क्लेम भी उठा लिया गया।
उज्जैन बना घोटाले का मुख्य केंद्र
राज्यभर में फैले इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा केंद्र धार्मिक नगरी उज्जैन बनकर उभरा है। अकेले उज्जैन जिले में ही करीब 8 करोड़ रुपये के फर्जी क्लेम के मामले उजागर हुए हैं। जांच एजेंसी ने यहां सबसे ज्यादा सक्रियता दिखाते हुए 27 मामले दर्ज किए हैं। उज्जैन के अलावा इंदौर, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है, जहां कुल मिलाकर 32 एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक अन्य उदाहरण बालू सिंह नाम के व्यक्ति का सामने आया है, जिनकी पॉलिसी होने के महज 64 दिनों के भीतर ही मौत दिखा दी गई और फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए क्लेम की राशि हड़प ली गई।
प्रशासनिक मिलीभगत पर गिरी गाज, 39 पर मुकदमा
सिस्टम की इस बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए EOW ने अब तक 39 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजद आरोपियों में सरपंच, पंचायत सचिव, बीमा एजेंट और कंपनी के कुछ संदेहास्पद कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस अब उन खातों की तलाश कर रही है जिनमें क्लेम की यह भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इसमें शामिल कुछ बड़े सफेदपोशों और बीमा कंपनी के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल इस खुलासे के बाद पूरे प्रदेश के बीमा सेक्टर और ग्रामीण प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।


