मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के अमिला क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यूपी ग्रामीण बैंक की अमिला शाखा से जुड़े लोन धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी बनाए गए अमिला निवासी अजय उर्फ गोरेलाल सोनकर की बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने यूपी ग्रामीण बैंक के मुख्य द्वार के सामने अमिला-बोझी मुख्य मार्ग पर शव को रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। लगभग एक घंटे तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा।
परिजनों का गंभीर उत्पीड़न का आरोप, सीओ की समझाइश पर हटा जाम
मृतक की पत्नी सुजाता सोनकर और अन्य परिजन बैंक कर्मियों पर गंभीर उत्पीड़न का आरोप लगाते रहे। मौके पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी रविन्द्रनाथ राय ने शोकाकुल परिजनों को शांत कराने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे तत्काल अंतिम संस्कार न करने की जिद पर अड़े रहे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (CO) घोसी जितेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतका की पत्नी को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाकर ढांढस बंधाया, जिसके बाद बड़ी मुश्किल से शव को सड़क मार्ग से हटवाया जा सका।
मुक्तिधाम जाते वक्त भी सड़क पर लेटी पत्नी, परिजनों में दिखा आक्रोश
शव वाहन के रवाना होने के बाद भी परिजनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। अंतिम संस्कार के लिए जाते वक्त मृतक की पत्नी सुजाता अचानक शव वाहन के आगे सड़क पर लेट गईं। वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद उन्हें वहां से हटाया।
इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए दोहरीघाट मुक्तिधाम ले जाया गया, जहां मृतक के भाई मिठाई लाल ने उनका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान अजय के परिजन और ग्रामीण करीब 500 मीटर तक रोते-बिलखते शव वाहन के पीछे-पीछे दौड़ते नजर आए।
बैंक मैनेजर समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज
मृतक की पत्नी सुजाता सोनकर की लिखित तहरीर के आधार पर स्थानीय कोतवाली पुलिस ने मंगलवार की रात ही यूपी ग्रामीण बैंक अमिला शाखा के तत्कालीन बैंक मैनेजर सहित कुल चार नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सुजाता ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि बैंक के ठीक बगल में उनके पति गोरेलाल की मिठाई की एक दुकान हुआ करती थी। इसी नजदीकी का फायदा उठाकर तत्कालीन बैंक मैनेजर अनिल गोड, फील्ड अफसर देवशक्ति चौरसिया, आनंद राय और अमित राय (निवासी पिढउथ सिंहपुर) ने कथित तौर पर षड्यंत्र रचकर उनके पति के नाम पर पहले 9.50 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया।
लोन माफी का झांसा देकर 20 प्रपत्रों पर कराए थे हस्ताक्षर
आरोप है कि इसके बाद लोन माफ कराने का झांसा देकर फील्ड अफसर देवशक्ति चौरसिया, आनंद राय और अमित राय ने उनके पति से सादे बैंक वाउचर सहित करीब 20 विभिन्न दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। इसका फायदा उठाकर कथित रूप से 17 लाख रुपये का एक और बड़ा लोन उनके नाम पर मंजूर करा लिया गया और सारी रकम चुपचाप निकाल ली गई।
तहरीर के अनुसार, जब उक्त तत्कालीन बैंककर्मियों का तबादला हो गया, तब बैंक की तरफ से उनके घर पर लगभग 31 लाख रुपये के लोन की बकाया वसूली का नोटिस पहुंचा। इस नोटिस को देखकर गोरेलाल को भारी सदमा लगा और उन्हें पहली बार इस कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई।
इसके बाद से गोरेलाल लगातार तीव्र मानसिक तनाव में रहने लगे थे। जब उन्होंने इस लोन की रकम के बारे में आरोपी आनंद राय और अमित राय से पूछताछ की, तो वे हमेशा टालमटोल करते रहे और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
पुलिस प्रशासन का बयान
घोसी के क्षेत्राधिकारी (CO) जितेंद्र सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने पीड़ित पत्नी की तहरीर को आधार बनाते हुए तत्कालीन बैंक मैनेजर अनिल गोड, फील्ड अफसर देवशक्ति चौरसिया, आनंद राय और अमित राय के विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस इस पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है।


