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    कृषि के क्षेत्र में किसान नवाचारों से पेश कर रहे आत्मनिर्भरता की मिसाल

    भोपाल : प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कृषि के क्षेत्र में नवाचार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे है। पांढुर्णा ज़िले के ग्राम राजना के प्रगतिशील कृषक रमेश सातहाते ने नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने सात एकड़ में स्वीटकॉर्न फ़सल से दस लाख रुपए से अधिक का मुनाफ़ा कमाया है और प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त किया है।

    किसान रमेश द्वारा बताया गया कि अक्टूबर माह में लगाई गई स्वीटकॉर्न की फ़सल को व्यापारी खेत से ही 15 रुपये प्रति किलो की दर पर खरीद कर रायपुर और नागपुर ले जा रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 120 क्विंटल की उपज प्राप्त हो रही हैं। लगभग तीस हज़ार रूपये का खर्चा काटकर भी डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ का मुनाफ़ा प्राप्त हो रहा है। इस प्रकार के नवाचारी किसान ज़िले के अन्य किसानों के लिये भी प्रेरणास्रोत हैं। राजना एवं सिवनी ग्राम में ही लगभग 50 किसानों द्वारा लगभग 100 एकड़ में स्वीटकॉर्न की फ़सल रबी सीजन में ली जा रही है।

    किसान कैलाश पवार ने पथरीली भूमि में जी-9 केले की खेती से किया नवाचार

    छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम भुताई के प्रगतिशील किसान कैलाश पवार ने नवाचार के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। पवार ने लगभग 18 एकड़ क्षेत्र में केले की उन्नत किस्म जी-9 की खेती कर यह साबित कर दिया है कि कठिन मानी जाने वाली भूमि में भी आधुनिक तकनीक के सहारे बेहतर उत्पादन संभव है। उन्होंने गत वर्ष अप्रैल माह में पुणे से जी-9 किस्म के पौधे मंगवाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ रोपण किया था, जो मात्र लगभग 11 माह में पूरी तरह तैयार हो गई है।

    किसान पवार ने बताया कि 15 फरवरी के बाद मार्च माह तक पूरी फसल की कटाई हो जाएगी और प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक लाभ होने की संभावना है। फसल की गुणवत्ता को देखते हुए जबलपुर एवं नागपुर के व्यापारियों ने खेत पर पहुँचकर निरीक्षण किया है तथा वे सीधे खेत से ही उपज खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह केला पथरीली एवं मुरम वाली उस भूमि पर उगाया गया है, जहाँ सामान्यतः अन्य फसलें लेना संभव नहीं माना जाता।

    कृषि विभाग की टीम ने भी खेत पर पहुँचकर इस नवाचार का अवलोकन किया और किसान द्वारा अपनाई गई तकनीकों की सराहना की। किसान कैलाश पवार पूर्व से ही नवाचारी किसान रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्ष लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छा लाभ अर्जित किया था। वर्तमान वर्ष में भी उन्होंने 6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी, एक एकड़ में ब्लूबेरी तथा एक एकड़ में गोल्डन बेरी की खेती की है, जिसकी उपज 15 फरवरी के बाद बाजार में आने की संभावना है। कैलाश पवार की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह संदेश देती है कि नवाचार, तकनीक और मेहनत के साथ कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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