जयपुर।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही कथित बर्बरता की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग करते हुए इसे भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही कथित बर्बरता की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग करते हुए इसे भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है। गहलोत ने कहा कि महज औपचारिक चिंता जताने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।पूर्व सीएम गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए लिखा कि बांग्लादेश से आ रही खबरें अत्यंत विचलित करने वाली हैं। उन्होंने दावा किया कि बीते 19 दिनों में पांच हिंदुओं की हत्या की गई है और महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो मानवता पर कलंक हैं। गहलोत ने कहा कि भारत, एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक देश होने के नाते, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के जीवन और सम्मान की रक्षा को लेकर नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।1971 का उदाहरण देकर केंद्र को घेरा
गहलोत ने 1971 के ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कूटनीतिक दृढ़ता की सराहना की। उन्होंने लिखा कि वह दौर आज भी यादों में ताजा है, जब इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ कूटनीतिक मजबूती दिखाई, बल्कि अपनी इच्छाशक्ति से इतिहास और भूगोल दोनों बदल दिए। गहलोत के मुताबिक, उस समय अमेरिका जैसी महाशक्ति की परवाह किए बिना भारत ने अपने हितों और मानवीय मूल्यों की रक्षा की थी, जबकि अमेरिका ने भारत के खिलाफ अपना सातवां बेड़ा रवाना कर दिया था।
“जिस देश का निर्माण भारत ने किया, वही आज खिलाफ”
पूर्व मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश को लेकर एक और कड़ा बयान देते हुए लिखा कि यह बेहद चिंताजनक है कि जिस देश का निर्माण भारत के सहयोग और बलिदान से हुआ, वही आज भारत के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति और कूटनीति की विफलता बताया। गहलोत ने कहा कि भारत सरकार को केवल रस्मी बयानों से आगे बढ़ते हुए ठोस कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी पहल करनी चाहिए।
राज्य सरकार पर भी साधा निशाना
विदेश नीति के मुद्दे के साथ-साथ गहलोत ने राजस्थान की भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने राज्य में हाल ही में आयोजित कार्यक्रमों और आयोजनों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गहलोत ने लिखा कि राजस्थान में प्रशासनिक और सरकारी अराजकता का माहौल है, जहां न कहने वाला है और न देखने वाला। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के हक के पैसे की खुलकर बर्बादी हो रही है, जैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।
‘राइजिंग राजस्थान’ और ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ पर सवाल
पूर्व सीएम ने ‘राइजिंग राजस्थान’ और ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ जैसे आयोजनों को “नाटक” करार देते हुए कहा कि ये कार्यक्रम पूरी तरह विफल हो चुके हैं। गहलोत के अनुसार, इन आयोजनों में न तो निवेशक नजर आए और न ही कोई ठोस परिणाम सामने आया। उन्होंने दावा किया कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रदेश की जनता को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
खेलो इंडिया और डिजिफेस्ट पर भी तंज
गहलोत ने ‘खेलो इंडिया गेम्स’ और ‘डिजिफेस्ट’ जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि खेलो इंडिया में खिलाड़ियों की दुर्दशा हुई, न पर्याप्त प्रतिभागी आए और न ही दर्शक। इसी तरह डिजिफेस्ट समिट में भी अव्यवस्था और कुप्रबंधन देखने को मिला।
“भाजपा सरकार में जवाबदेही खत्म”
अंत में गहलोत ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल प्रचार और आत्मप्रशंसा के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना खर्च करने के बाद जनता को आखिर मिला क्या। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है और जनता पूछ रही है कि कब तक उनके पैसे को इस तरह उड़ाया जाता रहेगा और इसकी जिम्मेदारी कब तय होगी।

