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    Homeराज्यमहाराष्ट्रस्मार्ट विलेज के नाम पर 1.13 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

    स्मार्ट विलेज के नाम पर 1.13 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

    गोवा। सीएम और जिला कलेक्टर के साथ अच्छे संबन्ध होने की तस्वीर दिखाकर, गोवा में ‘स्मार्ट विलेज’ परियोजना के नाम पर एक बड़े आर्थिक घोटाले का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस घोटाल में एक व्यापारी के साथ कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी होने की शिकायत पुलिस में दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपी डॉ. साजिद एन. सय्यद को गिरफ्तार कर लिया है. शिकायतकर्ता देवेशानंद दिगंबर शिरोडकर (उम्र 50 वर्ष) स्पीडकॉम इंटरनेट सर्विसेज प्रा. लि. कंपनी के निदेशक हैं। देवेशानंद दिगंबर शिरोडकर की शिकायत के अनुसार, आरोपी डॉ. साजिद एन. सय्यद ने खुद को “भारत CSR नेटवर्क” संस्था का अध्यक्ष और गोवा ‘स्मार्ट विलेज’ परियोजना से जुड़ा हुआ बताकर उनका विश्वास जीता.. अगस्त 2024 में पहचान होने के बाद आरोपी ने दावा किया कि गोवा राज्य में गोवा के सीएम के साथ मिलकर एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

    आरोपी ने मुख्यमंत्री के साथ फोटो दिखाकर किया गुमराह

    इस परियोजना में शामिल होने के लिए शुरुआत में 50 लाख रुपये जमा करने की बात कही गई. शिकायतकर्ता ने आरोपी पर भरोसा करते हुए सितंबर 2024 में एक्सिस बैंक के दो चेक के माध्यम से कुल 50 लाख रुपये दिए. इसके बाद आरोपी ने विभिन्न सरकारी अधिकारियों के साथ और गोवा के मुख्यमंत्री के साथ बैठकों के फोटो और वीडियो दिखाकर परियोजना को सरकारी समर्थन प्राप्त होने का भ्रम पैदा किया।

    पीड़ित की कंपनी ने गोवा में इंटरनेट हॉटस्पॉट सेवा की शुरू

    आरोपी के कहने पर शिकायतकर्ता की कंपनी ने गोवा के फोंडा, शिरोडा और कोलवाले में प्रायोगिक आधार पर इंटरनेट हॉटस्पॉट सेवा शुरू की. इस कार्य पर जुलाई 2025 तक लगभग 58 लाख रुपये खर्च हुए. इसके अलावा मुंबई में चिन्मय जेट्टी से बांद्रा पुलिस पुलिस स्टेशन तक 8 किलोमीटर फाइबर बिछाकर 7 CCTV कैमरे लगाने का काम भी किया गया, जिस पर करीब 5 लाख रुपये खर्च हुए।

    एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप

    हालांकि, काम पूरा होने के बावजूद आरोपी ने कोई भुगतान नहीं किया..बार-बार मांग करने पर भी आरोपी टालमटोल करता रहा, जिससे शिकायतकर्ता को शक हुआ…कुल जमा राशि और काम के खर्च को मिलाकर 1,13,04,586 रुपये की ठगी होने का आरोप लगाया गया है।

    आरोपी ने ‘लेटर ऑफ एम्पैनलमेंट’ जैसे दस्तावेज देकर परियोजना को आधिकारिक दिखाने की कोशिश की, लेकिन आगे की जांच में ये दस्तावेज संदिग्ध पाए गए.. साथ ही, आरोपी द्वारा अब तक कोई आधिकारिक समझौता (MOU) नहीं किए जाने का भी आरोप है . प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी ठगने की आशंका जताई जा रही है..इस मामले में संबंधित दस्तावेज, बिल और लेन-देन के सबूत पुलिस को सौंप दिए गए हैं और आगे की जांच जारी है। इस घटना ने ‘CSR’ और सरकारी परियोजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं..व्यापारियों को ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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