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    Homeराजनीतिशिवसेना में फिर विवाद, एमएलसी रघुवंशी ने किया बड़ा दावा

    शिवसेना में फिर विवाद, एमएलसी रघुवंशी ने किया बड़ा दावा

    धुले/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर मची भारी उठापटक के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा सामने आया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह सनसनीखेज दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कुशल नेतृत्व और बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा पर भरोसा जताते हुए आधिकारिक तौर पर शिवसेना के शिंदे गुट का दामन थाम लिया है।

    रघुवंशी ने कहा, "महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी तरह सफल हो चुका है। इन 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया है और मैं पार्टी में उनका दिल से स्वागत करता हूं।" उन्होंने आगे तर्क दिया कि यदि किसी भी जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र की जनता के विकास के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करना है, तो उसे शिवसेना-भाजपा के इस मजबूत और राष्ट्रवादी गठबंधन के साथ ही आना होगा।

    2022 जैसी बड़ी टूट की आहट और क्या है सांसदों का गणित?

    महाराष्ट्र की सियासत में पिछले कुछ दिनों से 'ऑपरेशन टाइगर' शब्द को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म था। अब इस ताजा घटनाक्रम ने साल 2022 की उस ऐतिहासिक बगावत की यादें ताजा कर दी हैं, जब एकनाथ शिंदे ने विधायकों के साथ मिलकर उद्धव सरकार को गिरा दिया था।

    संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में दलबदल-विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की कार्रवाई और अयोग्यता से बचने के लिए किसी भी पार्टी के कुल सांसदों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत होना अनिवार्य है। लोकसभा में उद्धव गुट के पास कुल 9 सांसद हैं, ऐसे में कानूनी तौर पर अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय के लिए कम से कम 6 सांसदों की आवश्यकता थी। सूत्रों के अनुसार, इन बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है, जिसकी घोषणा आगामी 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस पर होने की पूरी संभावना है।

    केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव का संजय राउत पर तीखा हमला

    इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बीच केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता संजय राउत को आड़े हाथों लिया। जाधव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संजय राउत की अमर्यादित भाषा, अहंकार और विवादित बयानबाजी ही आज उनकी पार्टी के इस भारी पतन और विनाश का मुख्य कारण बन रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि बागी सांसदों द्वारा दिए गए आधिकारिक पत्र पर अब अंतिम और कानूनी फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ही करना है। जाधव ने यह भी कहा कि 19 जून को पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में केवल वही सच्चे सैनिक शामिल होंगे, जो बालासाहेब ठाकरे के मूल हिंदुत्व और विचारों के प्रति पूरी तरह वफादार हैं।

    संजय राउत का पलटवार और 3-लाइन का कड़ा व्हिप जारी

    दूसरी ओर, इस संभावित महा-संकट को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह डैमेज कंट्रोल और कानूनी घेराबंदी में जुट गई है। दिल्ली में सांसद अरविंद सावंत के साथ एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए संजय राउत ने सत्ताधारी दल पर तीखे आरोप लगाए। राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को तोड़ने के लिए ₹50-50 करोड़ का बड़ा लालच दिया जा रहा है और दिल्ली जाने वाले चार्टर्ड विमान में बैठने से पहले ही ₹15 करोड़ बतौर एडवांस दिए गए हैं।

    पार्टी के कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए लोकसभा में उद्धव गुट के नेता अरविंद सावंत ने सभी 9 सांसदों के नाम एक सख्त 'तीन-पंक्ति वाला व्हिप' (Three-Line Whip) जारी किया है। इस व्हिप के जरिए सभी सांसदों को दिल्ली स्थित संसद कार्यालय में आयोजित होने वाली संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। राउत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ये सभी सांसद उद्धव ठाकरे के चेहरे और 'मशाल' चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ गद्दारी करने वालों को महाराष्ट्र के लोग कभी माफ नहीं करेंगे।

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