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    Homeमनोरंजन‘द्रौपदी’ से राजनीति तक: रूपा गांगुली की संघर्षभरी कहानी

    ‘द्रौपदी’ से राजनीति तक: रूपा गांगुली की संघर्षभरी कहानी

    संघर्ष से सफलता तक: रूपा गांगुली के जीवन का प्रेरणादायी सफर और बंगाल की राजनीति में नया पद

    अभिनय की दुनिया से राजनीति के गलियारों तक, रूपा गांगुली का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण और संघर्षपूर्ण रहा है। निजी जीवन की उथल-पुथल से लड़ते हुए आज वे उस मुकाम पर हैं जहाँ उनका राजनीतिक परिश्रम रंग ला रहा है। पश्चिम बंगाल की नई सरकार में शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, अब चर्चा है कि भाजपा की कद्दावर नेता रूपा गांगुली को भी कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या बड़ा संवैधानिक पद सौंपा जा सकता है।

    आइए जानते हैं उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में:

    'द्रौपदी' के रूप में मिली वैश्विक पहचान

    रूपा गांगुली ने अपने करियर का आगाज बंगाली सिनेमा से किया था, लेकिन उन्हें असली पहचान बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक 'महाभारत' (1989) से मिली। द्रौपदी के किरदार में उनके जीवंत अभिनय ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। आज भी भारतीय टेलीविजन के इतिहास में द्रौपदी का जिक्र होते ही रूपा गांगुली का चेहरा सामने आ जाता है।

    राजनीति में सक्रियता और महिला सशक्तिकरण

    रूपा गांगुली हमेशा से महिला अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने साल 2015 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा।

    • राज्यसभा का सफर: साल 2016 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया, जहाँ उन्होंने संसद के भीतर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया।

    • 2026 विधानसभा चुनाव: बंगाल के 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए टिकट दिया और जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया। अब वे बंगाल की नई सरकार में एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।


    निजी जीवन की कड़वी यादें और संघर्ष

    रूपा गांगुली की सफलता के पीछे दुखों का एक गहरा सागर भी रहा है। साल 1992 में उन्होंने ध्रुबो मुखर्जी से विवाह किया, लेकिन यह रिश्ता उनके लिए मानसिक प्रताड़ना का सबब बन गया। वैवाहिक जीवन के तनाव के चलते वे इस कदर टूट गई थीं कि उन्होंने तीन बार आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की, लेकिन हर बार वे मौत को मात देकर वापस आईं।

    बेटे के जन्म के साथ मिली नई उम्मीद

    1997 में बेटे आकाश के जन्म ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।

    • स्वतंत्रता का फैसला: खुद के आत्मसम्मान को वापस पाने के लिए उन्होंने अंततः अपने पति से अलग होने का फैसला किया और मुंबई आकर दोबारा अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया।

    • भावुक रिश्ता: उन्होंने अपने बेटे की कस्टडी के लिए कोई कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी और उसे पिता के पास ही रहने दिया। आज उनका बेटा बड़ा हो चुका है और दोनों के बीच एक बेहद प्यार भरा और समझदारी वाला रिश्ता है।

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