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    गहलोत ने सरकार को घेरा, कहा- घुमंतू समाज पर बल प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

    जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समाज (डीएनटी) के महापड़ाव पर बुधवार को पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। विद्याधर नगर के जेडीए ग्राउंड में जुटे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने नियंत्रण पाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस हिंसक झड़प और पुलिसिया कार्रवाई के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने इस कदम को अलोकतांत्रिक और दमनकारी बताते हुए सरकार की अनुभवहीनता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

    बातचीत के बजाय बल प्रयोग सरकार की नाकामी: अशोक गहलोत

    पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने लिखा कि घुमंतू समाज हमारे देश और प्रदेश के सबसे वंचित व कमजोर तबकों में से एक है। सरकार को उनकी जायज मांगों पर संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ विचार करना चाहिए था, लेकिन इसके उलट पुलिस के जरिए उन पर लाठीचार्ज करवाना और आंसू गैस के गोले दगवाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। गहलोत ने आगे कहा कि मौजूदा सरकार यह बुनियादी बात समझने में पूरी तरह नाकाम रही है कि किसी भी लोकतांत्रिक विवाद का स्थाई हल सिर्फ और सिर्फ आपसी संवाद से ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रशासन को इस महापड़ाव की पहले से सूचना थी, तो अधिकारियों ने समय रहते उनके प्रतिनिधिमंडल से वार्ता क्यों नहीं की? ऐसी अप्रिय स्थिति का पैदा होना सीधे तौर पर शासन की अनुभवहीनता का नतीजा है।

    आवाज दबाने के बजाय संवेदनशीलता दिखाए सत्ता पक्ष: सचिन पायलट

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी इस लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपने जायज हकों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे घुमंतू समाज पर इस तरह बल प्रयोग किया जाना लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है। लोकतंत्र हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार देता है। जब समाज का कोई शोषित और उपेक्षित वर्ग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, तो सत्ता में बैठे लोगों को उसकी आवाज को लाठियों के दम पर दबाने के बजाय बेहद संवेदनशील रवैया अपनाकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। पायलट ने सरकार से मांग की कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर समाज की चिंताओं का उचित निवारण करे।

    कमजोरों पर पुलिसिया कार्रवाई बर्दाश्त नहीं: टीकाराम जूली

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी डीएनटी समुदाय के महापड़ाव स्थल पर हुए इस घटनाक्रम की कड़े लहजे में आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जो समाज पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है, उस पर इस तरह का पुलिसिया अत्याचार बेहद शर्मनाक है। विपक्ष इस दमनकारी नीति की पुरजोर निंदा करता है और पीड़ित समाज के साथ मजबूती से खड़ा है।

    जानिए क्यों बेकाबू हुए हालात और कैसे भड़की हिंसा

    विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समाज की विभिन्न जातियां बुधवार को जयपुर के विद्याधर नगर जेडीए ग्राउंड में अपनी मांगों के समर्थन में एक विशाल महापड़ाव के लिए एकत्रित हुई थीं। इस प्रदर्शन में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से भी समाज के हजारों लोग पहुंचे थे। दिनभर चले धरने के बाद जब शाम तक शासन स्तर पर वार्ता का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए कूच कर दिया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी, जिसे पार करने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों में तीखी झड़प हो गई। देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया और पथराव शुरू हो गया, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 40 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से 15 प्रदर्शनकारियों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

    15 फीसदी आबादी और 10 प्रतिशत आरक्षण की मुख्य मांगें

    आंकड़ों के लिहाज से देखें तो राजस्थान की कुल आबादी में इन जातियों की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत मानी जाती है। घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जातियों के प्रदेशाध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया के अनुसार, कागजों में भले ही इनकी 32 जातियां दर्ज हों, लेकिन धरातल पर वास्तविक रूप से इनकी 53 जातियां निवास कर रही हैं जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। समाज की प्रमुख मांगों में मुख्य रूप से डीएनटी वर्ग के लिए पृथक 10% आरक्षण की व्यवस्था करना, जो लोग जहां सालों से बसे हुए हैं उन्हें वहीं पर स्थाई आवास का मालिकाना पट्टा जारी करना, तथा विभिन्न सरकारी सूचियों में इन जातियों के नामों में चल रही विसंगतियों व त्रुटियों को हमेशा के लिए दूर करना शामिल है। उनका साफ कहना है कि जब तक सरकार इन मांगों पर कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं देती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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