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    बिना गारंटी मिले लोन! पहली पीढ़ी के एमएसएमई उद्यमियों के लिए वरदान बनी क्रेडिट गारंटी स्कीम

    व्यापार : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार पहली पीढ़ी के उद्यमियों को सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीटीएमएसई) को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।

    बिना किसी तीसरे पक्ष की गारंटी के एमएसएमई उद्यमियों को मिलता है ऋण

    एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार, यह पहल एमएसएमई को कोलेटेरल फ्री ऋणों के लिए महत्वपूर्ण क्रेडिट गारंटी सहायता प्रदान करती है। इसकी मदद से सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) पारंपरिक संपार्श्विक या तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना ही वित्तीय सहायता हासिल कर सकते हैं। 

    10 करोड़ रुपये तक की ऋण सुविधा मिलती है एमएसएमई उद्यमियों को

    सीजीटीएमएसई के तहत, पात्र व्यवसाय 10 करोड़ रुपये तक के ऋण हासिल कर सकते हैं, जिसमें गारंटी कवरेज की सीमा 75 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक होती है, जो उधारकर्ता की प्रोफाइल और जो मूल्यांकन पर निर्भर करती है। यह योजना सभी सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) पर लागू होती है मंत्रालय के अनुसार, देश में लगभग 2.6 करोड़ सूक्ष्म और लघु उद्यम (MSE) हैं जो अनुमानित रूप से छह करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। 

    01 जनवरी 2000 से लागू है सीजीटीएमएसई योजना

    मौजूदा और नए दोनों उद्यम इस योजना के तहत मुक्त ऋण के लिए पात्र हैं। यह योजना औपचारिक रूप से 30 अगस्त 2000 को शुरू की गई थी और 1 जनवरी 2000 से लागू है। सीजीटीएमएसई के कोष में सरकार और SIDBI की ओर से  क्रमशः 4:1 के अनुपात में योगदान किया जा रहा है।

    दस लाख करोड़ से अधिक के ऋण किए जा चुके हैं स्वीकृत

    1 जुलाई 2025 तक, 1.2 करोड़ से अधिक गारंटी के एवज में योजना के तहत 10,26,145 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना के तहत अधिकतम ऋण महाराष्ट्र के लिए 1,26,521 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश (1,04,856 करोड़ रुपये) है। उसके बाद गुजरात का नंबर है। वहां के लिए स्कीम के तहत 85,160 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

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