नई दिल्ली: घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार, 6 जुलाई की सुबह सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। देश के अधिकांश बड़े शहरों में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम कम हुए हैं। दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना गिरकर $146,870$ रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। हालांकि, अगर पिछले पूरे हफ्ते पर नजर डालें, तो सोने में जोरदार तेजी रही थी, जहां 24 कैरेट सोना करीब $2,780$ रुपये और 22 कैरेट सोना $2,550$ रुपये प्रति 10 ग्राम तक मजबूत हुआ था। वैश्विक स्तर पर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) फिलहाल $4,175.02$ डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
महानगरों से लेकर प्रमुख शहरों तक गोल्ड रेट
देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय टैक्स और चुंगी के कारण सोने की कीमतों में थोड़ा अंतर देखा जा रहा है। आज देश के प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | 22 कैरेट सोने का भाव (₹/10 ग्राम) | 24 कैरेट सोने का भाव (₹/10 ग्राम) |
| दिल्ली | 1,34,640 | 1,46,870 |
| चेन्नई | 1,34,540 | 1,49,450 |
| अहमदाबाद | 1,34,810 | 1,46,770 |
| भोपाल | 1,34,540 | 1,46,770 |
| मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु | 1,34,490 | 1,46,720 |
| जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़ | 1,34,640 | 1,46,870 |
वैश्विक मांग कमजोर, जेपी मॉर्गन का अनुमान
दिग्गज वैश्विक वित्तीय संस्थान जेपी मॉर्गन (JPMorgan) के विश्लेषकों का मानना है कि इस साल सोने की कीमतों में तेजी तो आएगी, लेकिन इसकी रफ्तार सीमित रह सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रमुख औद्योगिक और उपभोक्ता सेक्टरों से सोने की वैसी मजबूत मांग नहीं निकल रही है जैसी उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, लंबी अवधि के अनुमान के अनुसार, साल की तीसरी तिमाही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,300$ डॉलर प्रति औंस और चौथी तिमाही तक $4,500$ डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है।
चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने के नक्शेकदम पर चलते हुए आज चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 6 जुलाई की सुबह भारतीय बाजार में चांदी $2,49,900$ रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान चांदी में $10,000$ रुपये की बड़ी तेजी देखी गई थी, जिसके बाद अब मुनाफावसूली हावी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी (स्पॉट सिल्वर) $62.47$ डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू स्तर पर स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की चाल जैसे मिले-जुले ग्लोबल फैक्टर्स इस उतार-चढ़ाव को तय कर रहे हैं।


