पाली। शहर में गहराते जल संकट के बीच हेमावास बांध से राहत की खबर आई है। लगभग सत्रह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हेमावास बांध का पानी एक बार फिर शहर के भीतरी क्षेत्रों के निवासियों की प्यास बुझाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वर्तमान में बांध में पर्याप्त जल संचय उपलब्ध है, जिसे नहर में छोड़ने के बजाय बांध के समीप विशेष पंप लगाकर सीधे जवाई पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। वहां से यह पानी भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचेगा और फिर भीतरी इलाकों में आपूर्ति की जाएगी। इस व्यवस्था के शुरू होने से स्थानीय नागरिकों को आगामी तीन से चार सप्ताह तक पानी की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। जलदाय विभाग ने इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने के लिए अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं।
नहर में अवरोधक निर्माण और पंप से जलापूर्ति
हेमावास बांध से निर्बाध जल उठाने के लिए बांध के आगे नहर वाले हिस्से में एक मजबूत दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चामुंडा माता मंदिर के पास स्थित बांध की मोरी से जल प्रवाहित करने पर उसे आगे व्यर्थ बहने से रोकना है। इसी अवरोधक के समीप अत्यधिक क्षमता वाला एक विशेष पंप स्थापित किया जा रहा है। यह शक्तिशाली उपकरण बहुत कम समय में लाखों लीटर पानी लिफ्ट करने में सक्षम है। जलदाय विभाग के अनुसार, जल प्रवाह को नियंत्रित रखते हुए इसे जवाई पाइपलाइन में डाला जाएगा, जिससे पानी बिना किसी रुकावट के भैरूघाट सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचेगा।
पूर्व में भी होता रहा है हेमावास के पानी का उपयोग
यह पहली बार नहीं है जब हेमावास बांध के जल का प्रयोग किया जा रहा हो, हालांकि इससे पहले मुख्य रूप से मंडली हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों के लिए ही इसका उपयोग किया जाता रहा है। पूर्व में टैगोर नगर, गांधीनगर और सोजत जैसे इलाकों में जलापूर्ति के लिए इस बांध के पानी पर निर्भरता रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सिटी हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों में जल्द ही इस नई व्यवस्था के तहत पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी और सभी तकनीकी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है।
विशाल जल योजना से सैंकड़ों गांवों की बुझेगी प्यास
पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध की क्षमता बढ़ाने और पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए बारह सौ करोड़ रुपये की लागत वाली एक वृहद परियोजना पर काम प्रस्तावित है। इसके तहत सेई और साबरमती नदियों पर नए जलाशयों का निर्माण कर टनल, पाइपलाइन और पंपिंग तकनीकों के माध्यम से पानी को जवाई बांध तक पहुंचाया जाएगा। इस महात्वाकांक्षी नेटवर्क के तैयार होने से जवाई बांध का जलस्तर सुधरेगा, जिससे पाली, सिरोही, शिवगंज और जैतारण क्षेत्र के लगभग नौ सौ से अधिक गांवों की प्यास बुझ सकेगी।
आधुनिक सुरंग और पाइपलाइन नेटवर्क की योजना
इस जल परियोजना के तहत पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। जहां ढलान की सुविधा होगी वहां प्राकृतिक प्रवाह से और जहां समतल या ऊंचाई होगी वहां प्रेशराइज्ड पाइपलाइन तथा पंपिंग से पानी आगे बढ़ाया जाएगा। योजना में कुल तीन बड़ी भूमिगत सुरंगों के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है, जिनकी कुल लंबाई कई किलोमीटर होगी। इसके अतिरिक्त दर्जनों किलोमीटर लंबी प्रेशराइज्ड और ग्रेविटी पाइपलाइनों का जाल बिछाया जाएगा। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह संपूर्ण क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।


