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    छत्तीसगढ़ में GST घोटाले का खुलासा! 76 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग मामले में बड़ी कार्रवाई

    राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) द्वारा कर चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग ने राजनांदगांव की व्यावसायिक इकाई मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। आधिकारिक जांच में यह बात सामने आई है कि उक्त फर्म ने पिछले छह महीनों के भीतर लगभग 76 करोड़ रुपये का ऐसा लेन-देन दिखाया जो वास्तव में हुआ ही नहीं था और वह केवल कागजों तक सीमित था। उपलब्ध दस्तावेजों और जीएसटी रिटर्न की बारीकी से जांच करने पर 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है, जिसके जरिए सरकारी राजस्व को भारी चपत लगाने की कोशिश की गई।

    शुरुआती पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी की फर्म ने पश्चिम बंगाल की कई संदेहास्पद कंपनियों से लोहे और स्टील (आयरन एवं स्टील) की कोई वास्तविक खरीदारी नहीं की थी। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के फर्जी बिल हासिल किए गए और उन बोगस बिलों के दम पर गलत तरीके से आईटीसी का फायदा उठाया गया। इतना ही नहीं, इस अवैध टैक्स क्रेडिट के लाभ को आगे अन्य करदाताओं को भी ट्रांसफर कर दिया गया।

    कागजी बिलिंग और बोगस नेटवर्क का पर्दाफाश

    जीएसटी विभाग की जांच टीम ने जब माल सप्लाई करने वाली इन कंपनियों के रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि इनमें से अधिकांश फर्मों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। इन कंपनियों द्वारा धरातल पर किसी भी प्रकार का वास्तविक व्यापार किए जाने का कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा है। कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला पूरी तरह से 'पेपर ट्रेडिंग' यानी सिर्फ कागजों पर बिलों की हेराफेरी करने और बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा है।

    फर्जीवाड़ा करने के लिए खड़ी की गईं फर्जी कंपनियां

    विभागीय कार्रवाई में यह भी साफ हुआ है कि जिन सप्लायर कंपनियों से माल खरीदना दिखाया गया था, उनमें से कई का गठन ही सिर्फ फर्जी बिल काटने और अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट मुहैया कराने के लिए किया गया था। जांच के दौरान मिले तथ्य और सबूत इशारा करते हैं कि माल का कोई वास्तविक परिवहन या आवागमन नहीं हुआ था, बल्कि केवल बिलों के लेन-देन के जरिए टैक्स बचाने का एक सोची-समझी साजिश के तहत ताना-बाना बुना गया था।

    बैंक खातों और परिवहन दस्तावेजों की गहन जांच

    इस बड़े टैक्स घोटाले में पर्याप्त और ठोस सबूत मिलने के बाद ही राज्य कर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश्वर चौरड़िया को हिरासत में लिया है। इस पूरे सिंडिकेट की विस्तृत जांच अभी भी की जा रही है। शुरुआती पूछताछ और छानबीन से संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कई और रसूखदार लोग तथा अन्य कारोबारी फर्में जुड़ी हो सकती हैं। विभाग अब संदिग्धों के बैंक खातों, ई-वे बिल, माल ढुलाई से जुड़े परिवहन दस्तावेजों के साथ-साथ इस खेल में शामिल अन्य व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रहा है।

    जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस फर्जी बिलिंग रैकेट की कड़ियां जोड़ने पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। विभाग ने साफ किया है कि देश के ईमानदार टैक्सपेयर्स के हितों की सुरक्षा के लिए बोगस आईटीसी और फर्जी बिलिंग जैसे अवैध कामों में लिप्त तत्वों के खिलाफ इस तरह की सख्त और दंडात्मक कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

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