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    TMC में टूट की अटकलें तेज, सौगत रॉय ने लगाए ‘ऑपरेशन लोटस’ के आरोप

    कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहराते गंभीर राजनीतिक संकट और आंतरिक अंतर्विरोधों के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कुछ पार्टी सांसदों के हवाले से दावा किया है कि कई जनप्रतिनिधियों ने किसी भी आधिकारिक दस्तावेज पर दस्तखत नहीं किए हैं, फिर भी उनके नामों का दुरुपयोग किया जा रहा है। वरिष्ठ नेता ने वर्तमान में चल रही इन तमाम गतिविधियों को पूरी तरह अनैतिक और अनुचित करार दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में हस्ताक्षरों की एक फर्जी सूची प्रसारित की जा रही है और अभी तक यह आंकड़ा भी साफ नहीं है कि वास्तव में 18, 19 या 20 सांसदों ने बगावत की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दो-तिहाई बहुमत के तकनीकी फॉर्मूले पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस असंवैधानिक खेल में कोई दिलचस्पी नहीं है।

    ममता बनर्जी के नाम पर जीते और अब पाला बदलने की तैयारी

    वरिष्ठ सांसद ने असंतुष्ट नेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए याद दिलाया कि ये सभी जनप्रतिनिधि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने स्वयं इनके निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर जनता से वोट मांगे थे और संगठन ने उन्हें पूरा सांगठनिक व वित्तीय समर्थन दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक ऐसी क्या परिस्थितियां बन गईं कि ये नेता अपनी मातृ पार्टी को छोड़ने का विचार करने लगे हैं। सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि बागी गुट के नेता केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से गुप्त मुलाकातें कर रहे हैं और देश के गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलने का समय मांग रहे हैं। उन्होंने राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब कुछ भारतीय जनता पार्टी के 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा है, जिसके जरिए भाजपा गैर-वैधानिक तरीके से संसद में अपनी संख्या बल बढ़ाना चाहती है।

    शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता और 'ऑपरेशन लोटस' की आहट

    पार्टी के वरिष्ठ खेमे ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की हालिया गतिविधियों पर भी तीखी नजर रखी हुई है। सौगत रॉय के अनुसार, एक तरफ जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता समिक भट्टाचार्य अस्वस्थता के चलते अस्पताल में उपचाराधीन हैं, वहीं दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक रूप से बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने हालिया घटनाक्रम के तहत शाम के समय टीएमसी की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के निजी आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और उसके तत्काल बाद कोलकाता में पार्टी के कई अन्य असंतुष्ट चेहरों के साथ बंद कमरों में बैठकें कीं। इन मुलाकातों से साफ संकेत मिलते हैं कि विपक्षी खेमा तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने और 'ऑपरेशन लोटस' की पटकथा को धरातल पर उतारने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।

    उतार-चढ़ाव के बीच 19 लोकसभा सांसदों की कथित सूची आई सामने

    इस पूरे सियासी घमासान के बीच शुक्रवार को लोकसभा के 19 तृणमूल सांसदों के हस्ताक्षरों से युक्त तीन पन्नों का एक कथित दस्तावेज सामने आने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। इस गुप्त दस्तावेज में दावा किया जा रहा है कि यह बागी गुट लोकसभा के भीतर टीएमसी के मुख्य और वास्तविक बहुमत वाले धड़े का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये पन्ने उसी मुख्य पत्र का हिस्सा हैं जिसे सांसदों ने काकोली घोष और शताब्दी रॉय की अगुवाई में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) कार्यालय को सुपुर्द किया है। इस विवादित सूची में पहला नाम काकोली घोष और दूसरा शताब्दी रॉय का बताया जा रहा है, जबकि अन्य हस्ताक्षरों में बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश वर्मा बसुनिया, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, रचना बनर्जी और सयोनी घोष के नाम शामिल हैं, हालांकि इन दस्तखतों की सत्यता की कोई स्वतंत्र जांच नहीं हुई है।

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