मुंबई। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) में एक बार फिर बड़ी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं, जहां उनके 6 सांसदों के पाला बदलने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि देर रात देश की राजधानी पहुंचे ये सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। इसी गहमा-गहमी के बीच, उपमुख्यमंत्री के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे कुछ जनप्रतिनिधियों को एक निजी विमान से लेकर दिल्ली पहुंचे हैं, जहां खुद मुख्यमंत्री भी डेरा डाले हुए हैं। इस संभावित बागी सूची में नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा था, लेकिन अब उनके एक ताजा बयान ने उद्धव खेमे को बहुत बड़ी राहत दी है। वाजे ने मीडिया से रूबरू होते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि उनका दिल्ली दौरा किसी राजनीतिक दल-बदल के लिए नहीं, बल्कि एक पूर्व निर्धारित समिति की बैठक में शामिल होने के लिए हुआ है और उन्हें सांसदों के पाला बदलने जैसी किसी भी गतिविधि की कोई जानकारी नहीं है।
उद्धव ठाकरे के प्रति वफादारी का दावा और अफवाहों का खंडन
सांसद राजाभाऊ वाजे ने अपने रुख को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि वह उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और भविष्य में भी उनके साथ ही बने रहेंगे। उन्होंने किसी भी अन्य राजनीतिक गुट से बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका किसी से कोई संपर्क नहीं हुआ है और न ही उन्हें मुख्यमंत्री या उनके किसी प्रतिनिधि का कोई फोन आया है। उन्होंने साफ किया कि वह संगठन या नेतृत्व से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की। राउत ने लिखा कि नासिक के सांसद केवल इंडस्ट्री कमेटी की बैठक का हिस्सा बनने दिल्ली गए हैं, जबकि मीडिया में इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
हिंगोली और धाराशिव के सांसदों को लेकर स्थिति स्पष्ट
बगावत की इन खबरों के बीच हिंगोली से सांसद नागेश अष्टेकर ने भी सामने आकर इन चर्चाओं को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उन्होंने जानकारी दी है कि वह दिल्ली गए ही नहीं हैं, बल्कि अपने गृह क्षेत्र हिंगोली में ही मौजूद हैं। दूसरी तरफ, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है और चर्चा है कि वह इस कथित 'ऑपरेशन' का हिस्सा हो सकते हैं और फिलहाल पुणे में हैं, हालांकि गोवर्धन वाडी स्थित उनके आवास पर पूरी तरह शांति का माहौल देखा गया। गौरतलब है कि ओमराजे निंबालकर को ठाकरे परिवार का बेहद वफादार माना जाता है और उन्होंने हालिया चुनाव में अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी अर्चना पाटील को साढ़े तीन लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त देकर सूबे में सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का गौरव हासिल किया था।
पर्दे के पीछे की राजनीतिक हलचल और सातवें सांसद की अटकलें
पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह कयास लगातार लगाए जा रहे हैं कि उद्धव गुट के सात सांसद टूटकर शिंदे खेमे में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार की रात 6 सांसदों के दिल्ली पहुंचने की खबर आई, जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गईं। अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की गहराई से पड़ताल की जा रही है कि क्या वाकई कोई अंदरूनी असंतोष है या फिर यह केवल विपक्षी खेमे को मानसिक दबाव में लाने की एक रणनीति है। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली में डेरा डाले शिंदे गुट के नेताओं और मुंबई में उद्धव ठाकरे के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।


